कमाई के मामले में भी यूपी सबसे आगे
रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान वित्त वर्ष में 26 राज्यों की कुल प्राप्तियां 69.4 खरब रुपये का अनुमान है। ये धनराशि पिछले वित्त वर्ष से 10.6 प्रतिशत ज्यादा है। राजस्व प्राप्तियों में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि और पूंजीगत प्राप्तियों में 6.6 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान बैंक ने लगाया है।
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इसमें भी एक बार फिर उत्तर प्रदेश के 13.3 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष पर बने रहने की उम्मीद है। दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र (11.3 प्रतिशत), और मध्य प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान 5.9 प्रतिशत के साथ काबिज हैं। तमिलनाडु इस बार शीर्ष पांच में शामिल नहीं है।
राज्य आंतरिक करों पर अधिक निर्भर रहेंगे
बैंक आफ बड़ौदा की रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी राज्य आंतरिक करों पर बहुत अधिक निर्भर रहेंगे और जीएसटी स्वयं के कर राजस्व का सबसे बड़ा हिस्सा होगा। राज्यों को जीएसटी, बिक्री कर, उत्पाद शुल्क और स्टाम्प शुल्क सहित अन्य करों से 89 प्रतिशत आय का अनुमान है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा जीएसटी (44.2 प्रतिशत) का होगा। नागालैंड (67.3 प्रतिशत), दिल्ली (59.7 प्रतिशत) और बिहार (57.1 प्रतिशत) जीएसटी पर सबसे अधिक निर्भर हैं, जबकि मध्य प्रदेश (38.6 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (37.4 प्रतिशत) और अरुणाचल प्रदेश (19.7 प्रतिशत) की निर्भरता कम है।
शराब और तम्बाकू पर लगने वाला राज्य उत्पाद शुल्क का योगदान 13.9 फीसदी होने का अनुमान जताया गया है। इस श्रेणी में शीर्ष तीन राज्य सिक्किम (27.3 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (24.9 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (21.4 प्रतिशत) हैं।