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UP: मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को अंडरटेकिंग देने के निर्देश, कोर्स को हरी झंडी मिलने के बाद कवायद तेज

Mon, 05 Aug 2024 09:18 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

नेशनल मेडिकल कमीशन ने बिजनौर, बुलंदशहर, कुशीनगर, पीलीभीत और सुल्तानपुर के मेडिकल कॉलेजों में 100-100 और ललितपुर एवं कानपुर देहात स्थित कॉलेज के लिए 50-50 सीटों पर एमबीबीएस का कोर्स शुरू करने की अनुमति दी। 
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- फोटो : istock
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों को एमबीबीएस कोर्स शुरू करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) को अंडरटेकिंग (दायित्व की पूर्ति संबंधी आश्वासन पत्र) देना होगा। इस पत्र के जारी होने के बाद ही एनएमसी लेटर ऑफ परमिशन (एलओपी) जारी करेगी। बिना एलओपी एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं शुरू हो सकती है। इसे देखते हुए चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशक (डीजीएमई) किंजल सिंह ने सभी प्रधानाचार्यों को जल्द निर्धारित फार्मेट में अंडरटेकिंग भेजने का निर्देश दिया है।

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प्रदेश में 13 नए मेडिकल कॉलेज बन कर तैयार हैं। इन कॉलेजों में लैब उपकरण से लेकर अन्य सामग्री की खरीद की जा चुकी है। यहां एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू करने के लिए पिछले साल आवेदन किया गया था, लेकिन एनएमसी से अनुमति नहीं मिली। इस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद मोर्चा संभाला।

इसके बाद एनएमसी ने बिजनौर, बुलंदशहर, कुशीनगर, पीलीभीत और सुल्तानपुर के मेडिकल कॉलेजों में 100-100 और ललितपुर एवं कानपुर देहात स्थित कॉलेज के लिए 50-50 सीटों पर एमबीबीएस का कोर्स शुरू करने की अनुमति दी। अब इन कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को सीट के मुताबिक व्यवस्था करने के संबंध में अंडरटेकिंग देनी होगी। डीजीएमई किंजल सिंह ने संबंधित प्रधानचार्यों को निर्देश दिया है कि निर्धारित फार्मेट में जल्द अंडरटेकिंग दी जाए। उन्होंने अंडरटेकिंग की प्रति डीजीएमई कार्यालय को भी भेजने का निर्देश दिया है।
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प्रधानाचार्यों को कार्रवाई का डर
इस आदेश के जारी होने के बाद कई प्रधानाचार्य असमंजस में हैं। उन्हें कार्रवाई का डर सता रहा है। एक प्रधानाचार्य ने बताया कि अंडरटेकिंग फार्मेट में कई शर्तें ऐसी हैं, जिन्हें पूरी करने में मुश्किलें आ रही हैं। क्योंकि उनके यहां संकाय सदस्यों की कमी है। प्रधानाचार्यों से यह भी कहा गया है कि एलओपी हासिल करने में अगर कोई कमी रही तो संबंधित प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे।

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