उत्तर प्रदेश में चालू वित्तीय वर्ष में विवाह पंजीकरण के दौरान 245 अंतरधार्मिक विवाह दर्ज किए गए हैं। एक अप्रैल से 26 अगस्त तक प्रदेश में कुल 40,122 विवाहों का पंजीकरण हुआ। इनमें 38,832 विवाह एक ही धर्म के जोड़ों के हैं, जबकि 1,045 पंजीकरण में पति-पत्नी के धर्म का विवरण दर्ज नहीं है। अंतरधार्मिक विवाह में सबसे ज्यादा जोड़े हिन्दू-मुस्लिम के हैं। दूसरे नंबर पर हिन्दू-सिख हैं।
पंजीयन विभाग के मुताबिक गाजियाबाद अंतरधार्मिक विवाहों के मामले में सबसे आगे है। यहां 35 ऐसे विवाह पंजीकृत हुए हैं। इसके बाद लखनऊ में 24, मेरठ और गौतमबुद्धनगर में 21-21, जबकि आगरा में 19 अंतरधार्मिक विवाह दर्ज हुए। कानपुर नगर में 12, बदायूं में 11, बरेली में 10 और पीलीभीत में सात ऐसे विवाह हुए हैं।
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हिन्दू-मुस्लिम जोड़ी सबसे ज्यादा जिलों में दर्ज : विभाग के मुताबिक अंतरधार्मिक विवाहों के लिए धर्मों की जोड़ियां भी दर्ज की गई हैं। इसके मुताबिक सबसे ज्यादा विवाह पंजीकरण हिन्दू-मुस्लिम जोड़ियों (38) का हुआ है।
इसके बाद हिन्दू-सिख जोड़ी (37), हिन्दू-जैन जोड़ी (27) और हिन्दू-ईसाई जोड़ियां (12) हैं। हिन्दू-पारसी जोड़ी दो और ईसाई-सिख तथा मुस्लिम-सिख जोड़ी एक-एक दर्ज हुई है। दिलचस्प बात ये है कि एक भी जोड़ी ईसाई-मुस्लिम की नहीं है।
2.6% पंजीकरण में धर्म का विवरण उपलब्ध नहीं: कुल 40,122 पंजीकरणों में 38,832 यानी करीब 96.8 प्रतिशत विवाह एक ही धर्म में हुए हैं। इसके अलावा करीब 2.6 प्रतिशत पंजीकरण में धर्म का विवरण उपलब्ध नहीं है। अंतरधार्मिक विवाहों का हिस्सा एक प्रतिशत से भी कम है।
विवाह पंजीकरण कराने की होड़: विवाह का पंजीकरण दंपती के वैवाहिक रिश्ते का कानूनी प्रमाण है। यह पासपोर्ट, वीजा, बैंक और बीमा संबंधी काम, उत्तराधिकार, संपत्ति और अन्य कानूनी मामलों में उपयोगी होता है। विवाद की स्थिति में विवाह प्रमाणपत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज के तौर पर काम करता है। इसी वजह से शहरी और शिक्षित वर्ग के साथ-साथ अब दूसरे जिलों में भी लोग विवाह के बाद पंजीकरण कराने पर जोर दे रहे हैं।