सेल्फ सर्विस का तर्क भी नहीं माना
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी तर्क दिया गया था कि हुक्का बाहर तैयार किया जाएगा और ग्राहक खुद उसे लेकर स्मोकिंग एरिया में जाएगा, इसलिए इसे सेवा नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया और कहा कि हुक्का पीने के लिए मानवीय सहायता आवश्यक होती है, इसलिए इसे सेवा की श्रेणी में माना जाएगा। फैसले में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार के संचालन के लिए लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है।
मुख्य सचिव और डीजीपी को भेजी जाएगी फैसले की प्रति
अदालत ने फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को सूचना और अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया है। फैसले में COTPA की संबंधित धाराओं के तहत पुलिस की कार्रवाई के अधिकारों का भी उल्लेख किया गया है।