फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

CM साहब! कब होंगी ये 3000 भर्तियां?

Mon, 16 Jun 2014 03:15 PM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
बेरोजगारों में ग्राम पंचायत अधिकारी के रिक्त 3000 पदों पर नौकरी की उम्मीद जगाए पूरे एक साल बीत गए, लेकिन करीब 40 लाख बेरोजगार युवा अब भी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं।
विज्ञापन


नौकरी के  इंतजार में खड़े युवाओं की यह तादाद विभागीय अफसरों के अनुमान पर आधारित है और इसमें अभी कुछ घट-बढ़ हो सकती है।

वजह, आवेदन आमंत्रित करने के नौ महीने बाद भी अफसर यही कह रहे हैं कि जिलों से आवेदकों की निश्चित संख्या का अब भी इंतजार है।

भर्ती के लिए नियमों के घालमेल में उलझी सरकार न तो भर्ती से जुड़े विसंगतिपूर्ण प्रावधान को खत्म करने का दम दिखा पा रही है, न ही मौजूदा नियमों के अनुसार इंटरव्यू कर रही है।

पिछले साल आई थीं भर्तियां

पंचायतीराज विभाग ने 12 जून 2013 को एक शासनादेश जारी कर पंचायतों में ग्राम पंचायत अधिकारी के रिक्त पदों पर भर्ती का फैसला किया था।

इसी शासनादेश में इस पद के लिए जरूरी तकनीकी योग्यता डोएक से सीसीसी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता से छूट भी दी गई थी। इसके बाद भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित करने का शासनादेश 14 अगस्त को जारी हुआ।

साथ ही भर्ती का पूरा कैलेंडर दिया गया था और हर हाल में 30 नवंबर तक साक्षात्कार पूरा कर एक सप्ताह में नवनियुक्त कर्मियों को नियुक्ति आदेश देने की बात कही गई थी।

पर, यह पूरा कैलेंडर धड़ाम हो गया। तय समय पर आवेदन जरूर आमंत्रित किए गए लेकिन इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया ही विभाग के लिए जी का जंजाल बन गई।

इंटरव्यू प्रकिया पर मामला लटका

अब 40 लाख से ज्यादा आवेदन आने के बाद अफसर तय नहीं कर पा रहे हैं कि वे इंटरव्यू की कैसी प्रक्रिया अपनाएं? वजह, हर जिले की चयन समिति को अपने मुताबिक अभ्यर्थी बुलाने की आजादी है।

इंटरव्यू का इंतजार कर रहे श्रावस्ती के एक आवेदक राजीव सिंह कहते हैं कि मुख्यमंत्री को स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए। भर्ती न सिर्फ जल्द से जल्द हो बल्कि पारदर्शी और युवाओं का भरोसा जीतने वाली भी हो।

भर्ती से ऐसा संदेश जाना चाहिए कि जिसे अवसर न मिले वह भी संतुष्ट हो। इसके लिए जरूरी हो तो नियमों में बदलाव से भी संकोच नहीं करना चाहिए। युवाओं का भरोसा जीतना है तो सरकार को साफ-सुथरे कदम उठाने होंगे।

कहां-कहां हुई चूक

- ग्राम पंचायत अधिकारी का ग्रेड पे 1800 से बढ़ाकर 2000 इस शर्त पर किया गया था कि अब इसकी भर्ती के लिए डोएक का सीसीसी सर्टिफिकेट जरूरी होगा।

ऐसा पंचायतों में कंप्यूटर साफ्टवेयर पर काम में तेजी लाने की वजह से किया गया था। पर, सरकार ने इस भर्ती के लिए इससे छूट ले ली। संदेश गया कि सरकार कुछ ऐसे लोगों को भर्ती कराना चाहती है जो बेसिक जानकारी लेने तक की क्षमता नहीं रखते।

- आवेदन के लिए ऑनलाइन की जगह मैनुअल प्रक्रिया अपनाई गई और रजिस्टर्ड डाक से आवेदन पत्र मंगाए गए। अब 40 लाख से ज्यादा आवेदन पत्रों को सहेजना और कंप्यूटर पर डाटा तैयार करना मुश्किल हो रहा है।

- समूह ‘ग’ में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के जरिये भर्ती का प्रावधान है। पंचायतीराज विभाग ने नियमों में बदलाव कर डोएक सर्टिफिकेट की शर्त तो हटवा ली लेकिन बड़ी तादाद में आवेदन आने के अनुमान के बावजूद लिखित परीक्षा का प्रावधान नहीं कराया।
विज्ञापन

क्यों चुप्पी साधे हैं अधिकारी?

- सिर्फ इंटरव्यू के जरिये भर्ती से पक्षपात के आरोप की आशंका। इससे बचने के लिए अफसर इंटरव्यू को लेकर चुप हैं।
- हर जिले की चयन समिति को इंटरव्यू के लिए आवेदकों की संख्या तय करने की आजादी है। हर जिले में अलग-अलग संख्या होने पर चयन प्रक्रिया को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।
- इंटरव्यू में न बुलाए जाने वालों की बड़ी तादाद के मद्देनजर आवेदकों का मुखर विरोध सामने आ सकता है।
- या तो इन समस्याओं का समाधान हो या समूह ‘ग’ की भर्ती के लिए प्रस्तावित अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को यह भर्ती भी सौंप दी जाए ताकि वे अनचाहे सवालों का सामना करने से बच सकें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें