आईटी सिटी की स्थापना के लिहाज से एक अहम कार्रवाई पूरी हुई। कहा जा रहा है कि इसके निर्माण से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुल 75 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।
सीजी सिटी में आईटी सिटी की स्थापना के लिहाज से यह कार्रवाई शुक्रवार को पूरी हुई। मुख्य सचिव आलोक रंजन की मौजूदगी में विकासकर्ता कंपनी, एसपीवी कंपनी व प्राधिकारी कंपनी के बीच त्रिस्तरीय अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए।
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार प्राप्त करने में समर्थ बनाने के लिए आईटी सिटी के 10 एकड़ में एक आधुनिक कौशल विकास केंद्र की स्थापना की जाएगी।
मुख्य सचिव के एनेक्सी स्थित कार्यालय में आईटी सिटी की विकासकर्ता कंपनी वामा सुंदरी इन्वेस्टमेंट लि. की ओर से पवन दनवर, स्पेशल परपज व्हीकल कंपनी-एचसीएल की ओर से डीके श्रीवास्तव व प्राधिकारी कंपनी यूपी इलेक्ट्रानिक्स कॉरपोरेशन लिमिटेड की तरफ से प्रबंध निदेशक सुधीर कुमार ने हस्ताक्षर किए। अब विकासकर्ता कंपनी आईटी सिटी के विकास का काम शुरू कर सकेगी।
1500 करोड़ का पूंजी निवेश
मुख्य सचिव ने बताया कि 100 एकड़ में आईटी सिटी का संपूर्ण विकास होने पर 25,000 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
आईटी सिटी के विकास पर करीब 1500 करोड़ का पूंजी निवेश होगा। निवेशक कंपनी को 25 करोड़ रुपये दस वर्षों तक ब्याज उपादान के रूप में मिलेगा।
आईटी सिटी को सेज का दर्जा मिल चुका है। इससे इसे भारत सरकार द्वारा सेज को दिए जाने वाले सभी लाभ व प्रोत्साहन मिलेंगे।
प्रमुख सचिव आईटी जीवेश नंदन ने बताया कि आईटी सिटी में यहां करीब 50 हजार लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। ये सहायक स्टाफ व संविदा स्टाफ के रूप में होंगे।
प्रशिक्षु छात्रों फीस में मिलेगी छूट
प्रस्तावित कौशल विकास केंद्र में 5000 छात्रों के प्रवेश की क्षमता होगी। इन छात्रों के लिए परिसर में ही छात्रावास की भी व्यवस्था होगी।
प्रदेश के मूल निवासी प्रशिक्षुओं को सरकार प्रति प्रशिक्षणार्थी ट्यूशन फीस में 50 फीसदी की सहायता देगी।
यह अधिकतम 5000 रुपये प्रतिमाह पांच वर्षों के लिए दी जाएगी। यहां पहले चरण में निजी सहयोगियों द्वारा आईटी कंपनी में कम से कम 3000 लोगों को रोजगार दिया जाएगा जबकि हर साल कम से कम 1000 छात्रों को प्रशिक्षित करना होगा।
दूसरे चरण में इस केंद्र से 5000 प्रशिक्षु उत्तीर्ण होंगे।
पांच वर्ष में पूरा होगा पहला चरण
मुख्य सचिव ने बताया कि परियोजना का प्रथम चरण पूरा होने में पांच वर्ष लगेंगे।
इसके अंतर्गत आधारभूत अवस्थापना सुविधाओं के विकास (अंदर की सड़कों का निर्माण, सीवेज, ड्रेनेज, जलापूर्ति, बिजली आपूर्ति, आप्टिकल फाइबर बिछाना व जमीन समतलीकरण) का काम विकासकर्ता कंपनी कराएगी।
30 एकड़ में आईटी इकाइयों की स्थापना होगी जबकि 10 एकड़ में भू-क्षेत्र विकास केंद्र की स्थापना का काम होगा।
दूसरे चरण में 20 एकड़ क्षेत्र में आईटी कंपनियों की स्थापना व बाकी 40 एकड़ में नॉन कोर क्षेत्र का विकास होगा।