इसे सोच में आया परिवर्तन कहें या फिर अपना अस्तित्व बचाए रखने की कोशिश सपा वह सब कुछ अपना रही है, जिसे लेकर पार्टी ने कभी मोदी पर निशाना साधा था।
प्रदेश सरकार सूबे में सत्ताधारी दल को लोकसभा चुनाव में मिली हार की एक बड़ी वजह अपने कामों का बेहतर प्रचार न कर पाने को बताती रही है। इसलिए प्रदेश सरकार ने जनहित में किए गए कार्यों के प्रचार पर अधिक बल देने का मन बना लिया है।
चुनाव बाद उसे इस बात का अंदाजा भी हो गया कि इसमें बड़े स्तर पर कोताही शासन के अफसर ही कर रहे है।
प्रशासनिक मशीनरी में बड़े पैमाने पर उलटफेर के बाद अब उसने ऐसे अफसरों के खिलाफ सख्त रवैया अपनाने का फैसला किया है।
गौरतलब है कि आम चुनाव में प्रचार के दौरान सपा मुखिया मुलायम सिंह और अखिलेश यादव ने मोदी के प्रचार के तरीकों की खूब निंदा की थी।
वेबसाइट पर डालने के बाद ही शासनादेश वैध
मुख्य सचिव ने शासन के निर्णयों से जुड़े शासनादेशों को ऑनलाइन जारी करने व इंटरनेट पर अपलोड करने में कोताही मिलने पर संबंधित अफसरों के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करने का आदेश जारी कर दिया है।
सरकार ने शासन के निर्णयों को जनता तक तेजी से पहुंचाने के लिए सरकार के निर्णयों व उस पर की जाने वाली कार्यवाही से जुड़े समस्त शासनादेश ऑनलाइन जारी करने का फैसला किया था।
आदेश दिया गया था कि न सिर्फ शासनादेश ऑनलाइन जारी ही होने चाहिए उसे सरकारी वेबसाइट पर पब्लिक डोमेन में तत्काल उपलब्ध करा दिया जाना चाहिए।
यहां तक प्रावधान किया गया था कि कोई भी विभाग मैनुअल शासनादेश जारी नहीं करेगा और किसी शासनादेश को तभी वैध माना जाएगा जब वह वेबसाइट पर उपलब्ध हो।
फाइलो में ही कैद रह गए जनहित से जुड़े निर्णय
सरकार के स्पष्ट आदेश के बावजूद कई विभाग शासन के इस निर्देश को हवा में उड़ाते रहे। जानकार बताते हैं कि लोकसभा चुनाव बाद सरकारी योजनाओं के जनता तक न पहुंच पाने की पड़ताल शुरू हुई तो यह बात भी सामने आई कि सरकार के जनहित से जुड़े तमाम निर्णय फाइलों में ही कैद रहे।
अफसरों ने उसे वेबसाइट (http://shasanadesh.up.nic.in) पर अपलोड तक नहीं कराया। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने इसे बेहद आपत्तिजनक मानते हुए इस पर सख्त रुख अख्तियार किया है।
उन्होंने समस्त प्रमुख सचिवों व सचिवों को एक सख्त आदेश जारी कर इस रवैये पर नाराजगी जताई है।
अफसरों को आगाह किया है कि वे आनलाइन शासनादेश जारी करने व उसे वेबसाइट पर उपलब्ध कराना सुनिश्चित कराएं। इसकी स्वयं मानीटरिंग करें।
...तो अधिकारी होंगे दंडित
शासनादेश के अनुसार अगर इसमें किसी प्रकार की शिथिलता पाई जाए तो संबंधित कर्मी के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही की जाए।
ये विभाग वेबसाइट पर नहीं डालते शासनादेश
अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत, आबकारी विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, कार्यक्रम क्रियान्वयन, कारागार प्रशासन, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, खादी ग्रामोद्योग, गृह गोपन, चिकित्सा, चीनी उद्योग, धर्मार्थ कार्य, नागरिक उड्डयन, निर्वाचन, पर्यटन, पर्यावरण।
इसके अलावा प्रशासनिक सुधार, प्राविधिक शिक्षा, होमगार्ड, राज्य योजना आयोग, मुख्यमंत्री कार्यालय, युवा कल्याण, भाषा, बैंकिंग, पिछड़ा वर्ग, लोक शिकायत, लोक सेवा प्रबंधन, वाह्य सहायता, सतर्कता, समन्वय, संसदीय कार्य, सार्वजनिक उद्यम, संस्कृति।