प्रचार के मोर्चे पर पिछले लोकसभा चुनाव में फेल होने की सच्चाई बार-बार कुबूलने के बाद अखिलेश सरकार अगले विधानसभा चुनाव से पहले अपनी उपलब्धियों का पूरे देश में बखान करने की तैयारी में जुटी गई है। इसके लिए एक निजी फर्म के चयन का प्रस्ताव है। सूचना विभाग ने इसकी कार्यवाही शुरू कर दी है।
पिछले लोकसभा चुनाव और उसके बाद में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रहे हों या उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी, इस बात की खूब शिकायत करते नजर आए कि देश की दूसरी सरकारों से बेहतर काम के बावजूद वे प्रचार में पीछे रह गए।
मुख्यमंत्री ने इसके लिए भाजपा पर कई बार ‘चालू पार्टी’ का तमगा मढ़ा। हालांकि लोकसभा चुनाव के बाद सूचना महकमे ने इस ओर सक्रियता बढ़ाई है। मसलन, परंपरागत प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अलावा सोशल मीडिया पर जोरदार प्रचार चल रहा है।
रेडियो और एफएम पर सरकार के गुणगान हो रहे हैं। एफएम पर सरकारी उपलब्धियों के प्रचार के लिए बाकायदा एक कार्यक्रम शुरू कराया गया। सरकारी सूचनाओं के लिए एक 24 घंटे की वेबसाइट भी शुरू की। मगर, बात शायद इतने भर से बनती नजर नहीं आ रही है।
इस तरह होगा काम का प्रचार
जानकार बताते हैं कि सड़क और बिजली के अलावा भर्तियों के विवाद और बदहाल कानून-व्यवस्था सरकार की सबसे कमजोर नस साबित हो रही है।
अब सूचना विभाग ने सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों, महत्वाकांक्षी योजनाओं व उपलब्धियों का प्रदेश के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक प्रचार करने की रूपरेखा तैयार की है।
तय किया है कि प्रदेश व प्रदेश के बाहर होर्डिंग, रूफटॉप, यूनीपोल, फ्लैक्स, के-आस्क, वाल राइटिंग व वाल टैटू जैसे प्रचार के सभी माध्यम आजमाए जाएंगे।
पुलिस बूथों, मॉल, बस क्यू शेल्टर, ट्री गार्ड, हाई-वे, एक्सप्रेस-वे, एअरपोर्ट कैंपस, रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, बस स्टेशन पर इनके जरिये प्रचार किया जाएगा।
सरकार विधानसभा चुनाव के पहले अपनी उपलब्धियों से माहौल बना लेना चाहती है। सूचना निदेशक आशुतोष निरंजन ने प्रदेश व प्रदेश के बाहर सरकारी योजनाओं के गुणगान के लिए फर्म के चयन की कार्यवाही शुरू कर दी है।