फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार किसान की मौत पर देगी 5 लाख रुपये

Tue, 14 Apr 2015 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को यूपी सरकार ने अब आपदा घोषित कर दिया है। यानी, प्रदेश सरकार किसानों को अब आसानी से राहत मुहैया करा सकेगी।
विज्ञापन


इस बीच, फसल बर्बादी के बाद खुदकुशी और सदमे के चलते किसानों की मौत से पीड़ित परिवारों को अखिलेश सरकार ने पांच-पांच लाख रुपये की मदद देने की घोषणा की है।

मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सोमवार को बताया कि हाल में आत्महत्या, सदमे या अन्य कारणों से जिन परिवारों में मौते हुईं, वे काफी गरीब थे। ऐसे में सरकार ने उन्हें मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक मदद देने का फैसला किया है।
विज्ञापन


यह मदद 99 लोगों की पहली सूची के साथ-साथ बाद में हुई मौतों पर भी दी जाएगी। सोमवार को मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य आपदा राहत कोष से दी जाने वाली सहायता के मानक में आत्महत्या व सदमे जैसे कारण नहीं थे। इसके चलते अब तक सहायता नहीं दी जा सकी।

फसलों के नुकसान पर किसानों ने नहीं की आत्महत्या

गौरतलब है कि ‘अमर उजाला’ ने सूबे में बेमौसमी बारिश व ओलावृष्टि से फसल बर्बाद होने के बाद किसानों की आत्महत्या और सदमे से मौतों को प्रमुखता से उठाया। सरकार ने इन सूचनाओं पर जिलाधिकारियों से रिपोर्ट मांगी थी।

अफसरों ने अपनी रिपोर्ट में पिछले दिनों 99 किसानों की आत्महत्या या अन्य वजहों से मौत की पुष्टि तो की लेकिन फसलों के नुकसान को इसकी वजह मानने से इन्कार कर दिया था।

सरकार ने तब आपदा राहत गाइडलाइंस में ऐसी मौतों पर मदद का प्रावधान न होने का हवाला देकर आर्थिक सहायता देने से मजबूरी जताई थी। लेकिन मौतों का सिलसिला नहीं थमा तो सरकार को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना पड़ा।

इसके बाद मुख्य सचिव ने कृषि उत्पादन आयुक्त आनंद मिश्र, प्रमुख सचिव राजस्व सुरेश चंद्रा व प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रसाद की अध्यक्षता में तीन अलग-अलग टीमें गठित कर प्रदेश में ऐसी मौतों की वजह पता कराने का फैसला किया।

ये टीमें जिलों से लौटकर सरकार को जमीनी हकीकत बता चुकी हैं। सरकार ने अपने अफसरों की जमीनी हकीकत समझने के बाद राहत देने का फैसला किया।

फैजाबाद में गलत चेक बांटने वाले बड़े अफसर भी नपेंगे
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने बताया कि फैजाबाद व अन्य जिलों में बहुत कम राशि के राहत चेक बांटने जैसी लापरवाही में बड़े अफसर भी नपेंगे। कमिश्नर फैजाबाद से लेखपाल के अलावा बाकी जिम्मेदार लोगों पर एक्शन लेने को कहा गया है। जिलाधिकारियों को साफ कहा गया है कि किसानों को 1500 सौ रुपये से कम मदद नहीं दी जाएगी।

राहत में लापरवाही तो डीएम नपेंगे

मुख्य सचिव ने सोमवार को प्रमुख सचिव राजस्व व राहत आयुक्त लीना जौहरी के साथ सूबे के राहत कार्यों की समीक्षा की। मुख्य सचिव ने कहा कि जिलाधिकारियों को दो टूक बता दिया गया है कि यदि किसानों को राहत पहुंचाने में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिली तो वे जिला प्रशासन के वरिष्ठ अफसरों के साथ वे भी सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे।

डीएम की छुट्टियां निरस्त, जो छुट्टी पर उनकी जगह नई तैनाती
पीड़ित किसानों को राहत देने में कोई मुश्किल न आए इसके लिए संबंधित जिलों के डीएम की छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं। मुख्य सचिव ने बताया कि अगर किसी डीएम की छुट्टी पहले से ही स्वीकृत है तो उसके स्थान पर तत्काल नई तैनाती करने को कहा गया है।

केंद्र को चिट्ठी- आरबीआई भी बदले फसल नुकसान का मानक
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने कृषि बीमा का 25 प्रतिशत हिस्सा आपदा पीड़ित किसानों में तत्काल वितरित कराने को कहा है।

उन्होंने केंद्रीय वित्त सचिव को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि जिस तरह केंद्र ने फसलों के नुकसान का मानक 50 प्रतिशत से बदलकर 33 प्रतिशत किया है उसी तरह रिजर्व बैंक को भी फसलों के नुकसान का मानक 50 के स्थान पर 33 प्रतिशत करने को निर्देशित किया जाए। तभी किसानों को पर्याप्त राहत मिल पाएगी। मुख्य सचिव ने आरबीआई के गवर्नर को भी इस संबंध में पत्र लिखा।
विज्ञापन

18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर ही मिलेगी मदद

किसानों को सरकार 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर ही मुआवजा देगी। पहले यूपी सरकार ने केंद्र के बराबर मुआवजा देने की घोषणा की थी।

सिंचित क्षेत्र में केंद्र की पुरानी गाइडलाइंस के हिसाब से नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा था, जिसे बढ़ाकर उसने 13,500 रुपये कर दिया है।

इस लिहाज से किसानों को 27 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मिलना चाहिए। लेकिन, राज्य सरकार ने यह रकम 18 हजार ही रखी है। यानी राज्य सरकार अपनी तरफ से नौ हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की जगह 4500 रुपये ही देगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें