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यूपीः आय बढ़ाने के लिए स्टांप शुल्क में 10 गुना तक वृद्धि का प्रस्ताव

Mon, 29 Jun 2020 12:36 PM IST
प्राची प्रियम महेंद्र तिवारी, अमर उजाला, लखनऊ
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सांकेतिक चित्र - फोटो : Social Media
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प्रदेश सरकार ने मौजूदा विलेखों पर स्टांप शुल्क में 2 से 10 गुना तक की वृद्धि का कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अलावा स्टांप देयता से बाहर करीब एक दर्जन नए क्षेत्रों को भी स्टांप शुल्क के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इसके लिए भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ख में संशोधन किया जाएगा।
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स्टांप शुल्क में वृद्धि से सरकारी खजाने में 400 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि का अनुमान है। हालांकि वृद्धि पर अंतिम फैसला कैबिनेट करेगी। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग ने महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों की स्टांप व्यवस्था का अध्ययन कर करीब छह माह पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने प्रजेंटेशन दिया था।

इसमें स्टांप शुल्क व रजिस्ट्रीकरण शुल्क में वृद्धि का सुझाव था। सरकार रजिस्ट्रीकरण शुल्क को तर्कसंगत बनाकर फरवरी में जरूरी वृद्धि कर चुकी है। स्टांप शुल्क में वृद्धि से संबंधित कार्यवाही पर विचार-विमर्श चल रहा था। सूत्रों के मुताबिक विभिन्न स्तर से प्राप्त सुझावों को शामिल कर विभाग ने कैबिनेट प्रस्ताव तैयार कर लिया है। 
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इन विलेखों के स्टांप शुल्क में वृद्धि का प्रस्ताव
विलेख का प्रकार लागू स्टांप शुल्क प्रस्तावित स्टांप शुल्क
शपथ पत्र 10 20
लिखत 10 100
प्रति या उद्धरण 10 20
अप्रेंटिसशिप पत्र 20 100
लाइसेंस पत्र 30 100
लीज सरेंडर 40 100
समझौता पत्र 50 200
प्रतिलेख या द्वितीय प्रति 50 100
न्यास का निरसन 80 500
क्षतिपूर्ति पत्र 80 100
दत्तक ग्रहण 100 1000
अधिकार क्रियान्वयन में नियुक्ति 50 100

 

बैंक गारंटी पर अधिकतम 5 लाख 

हाल के वर्षों में तेजी से औद्योगीकरण बढ़ा है और लाखों-करोड़ों के कार्य हो रहे हैं। लेकिन ऐसे कार्यों पर गारंटी राशि का 0.5 प्रतिशत लेकिन अधिकतम 10 हजार रुपये स्टांप शुल्क तय है। विभाग ने 20 लाख तक इसे वर्तमान दर पर बनाए रखने और इससे अधिक की बैंक गारंटी की राशि पर 20 पैसे प्रति 100 रुपये स्टांप देयता तय करने की योजना है। हालांकि इसकी अधिकतम सीमा 5 लाख रुपये रहेगी।

वर्तमान में संपत्ति के मौखिक विनिमय के रिकॉर्ड या घोषणा अथवा किसी सिविल या राजस्व न्यायालयों से डिक्री द्वारा अचल संपत्ति की विनिमय (एक्सचेंज ऑफ प्रापर्टी) से संबंधित डिक्री या आदेश पर स्टांप शुल्क नहीं लगता है। ऐसी संपत्तियों का पक्षकारों द्वारा खरीद-बिक्री का दस्तावेजीकरण नहीं कराया जाता। अब अचल संपत्ति के मौखिक लेन-देन के अभिलेख या घोषणा तथा अचल संपत्ति की खरीद-बिक्री की सिविल या राजस्व न्यायालय द्वारा पारित डिक्री या अंतिम आदेश को शामिल कर लिया गया है। महाराष्ट्र में यह व्यवस्था 2004 से लागू है।     

टीवी, सिनेमा, रेडियो विज्ञापन के अनुबंध पर लगेगा स्टांप शुल्क

सरकारी खजाना भरने के लिए प्रदेश सरकार ने कई ऐसे क्षेत्रों को भी स्टांप देयता के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जो अभी तक इससे बाहर हैं। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के कैबिनेट नोट में कई विलेखों पर स्टांप शुल्क में वृद्धि के लिए प्रजेंटेशन में प्रस्तावित दर को कम किया गया है तो कई जगह अधिकतम सीमा में वृद्धि या कमी की गई है।

इसी तरह प्रजेंटेशन में चिह्नित ज्यादातर नए क्षेत्रों को प्रस्ताव में स्टांप के दायरे में शामिल कर लिया गया है। लेकिन, कुछ एक संवेदनशील क्षेत्रों को नहीं छेड़ा गया है। टीवी, सिनेमा, रेडियो विज्ञापन के अनुबंध पर किसी तरह का स्टांप शुल्क नहीं लिया जाता है। अब टीवी, रेडियो, सिनेमा, केबल नेटवर्क या अन्य मीडिया साधनों पर विज्ञापन देने संबंधी अनुबंध पर (समाचार पत्रों को छोड़कर) 50 पैसा प्रति 100 रुपये अधिकतम तीन लाख रुपये स्टांप शुल्क का प्रस्ताव है। गुजरात राज्य में यह व्यवस्था 1 अप्रैल, 2006 से लागू है।

कई नए क्षेत्रों को स्टांप शुल्क के दायरे में लाने का प्रस्ताव

बौद्धिक संपदा अधिकार अनुबंध पर
बौद्धिक संपदा अधिकारों के अंतरण पर स्टांप शुल्क लगाने की योजना है। कॉपीराइट, ट्रेडमार्क व पेटेंट के तहत अंतरण के अनुबंधों पर एक रुपये प्रति 10 हजार रुपये तय करने का प्रस्ताव है। इसकी न्यूनतम सीमा 500 रुपये होगी। कर्नाटक में यह व्यवस्था 1 अप्रैल, 2012 से लागू है। 

फ्लोर एरिया रेशियो बढ़ाने पर भी स्टांप शुल्क
विभिन्न विकास प्राधिकरणों द्वारा आवासीय व व्यावसायिक परियोजनाओं में निर्मित क्षेत्रफल में वृद्धि के लिए फ्लोर एरिया रेशियो व या फ्लोर स्पेस इंडेक्स प्रतिफल के बदले बढ़ाया जाता है। अभी तक ऐसे मामलों में स्टांप लेने की व्यवस्था नहीं है। अनुच्छेद 23 में ग (4) नया क्लॉज जोड़कर ऐसे मामलों को स्टांप देयता के दायरे में लाया जा रहा है।

कॉरपोरेट सेक्टर में
- मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन ऑफ कंपनी के लिए कंपनी अधिनियम की धारा-26 के अधीन आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन लगाने पर विलेेेख पर 500 रुपये स्टांप शुल्क लगता है। इसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने का प्रस्ताव है। लेकिन यदि विलेख के साथ आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन नहीं लगाया गया है तब कंपनी की अंश पूंजी का 0.2 प्रतिशत अधिकतम सीमा (एक लाख रुपये) करने की योजना है। महाराष्ट्र में यह प्रावधान एक अप्रैल, 2006 से लागू है।  
- इसी तरह अनुच्छेद-10 में कंपनी के आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन के लिए 500 रुपये स्टांप शुल्क है। अब इसे कंपनी की कुल अंश पूजी के 0.2 प्रतिशत के बराबर तय करने की तैयारी है। इसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपये होगी। इससे नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन पर ज्यादा राशि मिलने का अनुमान है। महाराष्ट्र में यह प्रावधान 24 अप्रैल, 2015 से लागू है। 
- कंपनियों के विलय,  पुनर्गठन, मर्जर, डि-मर्जर, व टेकओवर के मामलों में वृद्धि हो रही है। इनमें बहुत बड़ी चल-अचल संपत्ति का अंतरण होता है। प्रदेश में स्पष्ट प्रावधान न होने से स्टांप देयता को लेकर विवाद होता रहता है। इससे प्रदेश को अपेक्षित आय नहीं हो पाती है। एक्ट में स्पष्टता के लिए अनुसूची-1 (ख) के अनुच्छेद-23 में क्लॉज 23 ग (1), ग (2) व ग (3) नए क्लॉज जोड़े जा रहे हैं। इससे ऐसे मामलों में राज्य को उचित स्टांप शुल्क बगैर किसी विवाद के मिल सकेगा।

ई-नीलामी के दायरे में 
सार्वजनिक नीलामी के जरिए बिक्री की जाने वाली अचल संपत्ति के लिए जारी विक्रय प्रमाण पत्र पर वर्तमान में विलेख में अंकित राशि पर हस्तांतरण की तरह स्टांप शुल्क लगता है। अब ई-नीलामी पर भी यह व्यवस्था लागू होगी।

बड़े मूल्य व दान की संपत्ति पर बाजार दर पर स्टांप शुल्क

खरीदी-बेची जा रही संपत्ति में पक्षकार के दिखाए गए बड़े मूल्य की संपत्ति पर भी अनुच्छेद 23-क में हस्तांतरण की तरह स्टांप शुल्क लगता है। अब ऐसे प्रकरण में मार्केट वैल्यू से स्टांप शुल्क लेने की योजना है। इसी तरह दान की संपत्ति पर पक्षकार के घोषित मूल्य पर स्टांप शुल्क के स्थान पर संपत्ति के मार्केट वैल्यू पर स्टांप शुल्क लेने की योजना है। महाराष्ट्र में ये प्रावधान 25 अप्रैल, 2004 से लागू है।   

टोल टैक्स पट्टे पर भी स्टांप शुल्क
एक्सप्रेस-वे व हाइवे पर बने टोल प्लाजा भी आय या लाभ में भागीदारी के आधार पर विभिन्न कंपनियों को टोल वसूली के पट्टे दिए जाते हैं। टोल प्लाजा भी इसके दायरे में आएंगे। टोल प्लाजा के पट्टों पर स्टांप शुल्क पूर्ववर्ती वर्षों में उस टोल प्लाजा के कुल संग्रह में 10 प्रतिशत बढ़ाकर तय किया जाएगा। इसी तरह शेयर के अंशों के आवंटन पत्र या अंशों के परित्याग पर वर्तमान में एक रुपये स्टांप शुल्क है। इसे एक रुपये प्रति 1000 या उसके भाग पर शेयरों के मूल्य पर तय होगा। 

लीज व पट्टे पर
एक्ट में स्पष्ट प्रावधान न होने से लीज (पट्टा/ किरायानामा) की लिखा-पढ़ी पर स्टांप नहीं ले पा रहे हैं। अब अनुच्छेद-35 में 35-घ एक उपखंड जोड़ा जा है। आय व लाभ में भागीदारी वाले लीज इसके दायरे में आएंगे। ऐसे विलेखों पर स्टांप देयता पट्टाधीन संपत्ति के मार्केट वैल्यू के 0.1 प्रतिशत को पट्टा अवधि के छह महीने के गुणकों से गुणा कर तय होगी। 

जमानती बांड या बंधक पत्र
वर्तमान में जमानती बांड पर अधिकतम 100 रुपये का स्टांप शुल्क है। अब किसी संविदा के अधीन शर्तों के पालन या किसी कार्यपालन के उत्तरदायित्व निवर्हन में जमानतदार द्वारा स्वयं अपने अनुपालन की जमानत दी जाती है तो जमानत की राशि पर 0.1 फीसदी, किंतु अधिकतम 5 लाख रुपये स्टांप शुल्क लेने का प्रस्ताव है। किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा किए जा रहे अनुपालन के मामले में पूर्व की तरह 100 रुपये ही लगेगा। महाराष्ट्र में यह प्रावधान 24 अप्रैल, 2015 से लागू है।   
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शेयर के आवंटन व परित्याग पर 

शेयर के आवंटन या परित्याग के लिए एक रुपये स्टांप शुल्क तय है। अब इसके स्थान पर 1 रुपये प्रति 10,000 या उसके भाग पर शेयरों के मूल्य पर स्टांप देना होगा। गुजरात में यह व्यवस्था एक अप्रैल-2006 से लागू है। इसी तरह कंपनियां या निगमित संस्थाएं शेयर, स्किप या स्टॉक जारी करती हैं।

इस शेयर, स्किप या स्टॉक के स्वामित्व अनुच्छेद-19 के अंतर्गत प्रमाणपत्र या अन्य लेखपत्र से प्रमाणित होता है। वर्तमान में इसके लिए भी एक रुपये स्टांप शुल्क तय है। अब स्टांप शुल्क को शेयरों के मूल्य से जोड़ते हुए शेयर मूल्य का 0.1 प्रतिशत स्टांप लेने का प्रस्ताव है। महाराष्ट्र में यह व्यवस्था 24 अप्रैल, 2015 से लागू है।

- पट्टे का अंतरण
वर्तमान में ऐसे विलेख पर पक्षकारों की ओर से तय राशि पर हस्तांतरण की तरह स्टांप शुल्क लिया जाता है। अब संपत्ति की मार्केट वैल्यू पर करने का प्रस्ताव है। महाराष्ट्र में यह व्यवस्था वर्ष 1994 से लागू है। महानगरों में नजूल संपत्तियां अथवा प्राधिकरणों द्वारा अंतरित आवासीय, व्यावसायिक व औद्योगिक परिसंपत्तियां लोगों को पट्टा अधिकारों के तहत प्राप्त होती हैं। ऐसी संपत्तियों का अंतरण व्यवहार में विक्रय के रूप में होता है। लेकिन ऐसी संपत्ति के वास्तविक मूल्य के अनुसार स्टांप शुल्क लेने में कठिनाई होती है।

कार्य संविदा
अनुसूची एक-ख में अनुच्छेद-66 जोड़ा जा रहा है। वर्तमान में  कार्यदायी संस्थाओं द्वारा दिए जाने वाले ठेकों के अनुबंध दस्तावेज में ठेकेेदार की प्रतिभूति राशि पर 100 रुपये स्टांप शुल्क लिया जाता है। अब महाराष्ट्र व गुजरात की तरह कार्य संविदा पर 10 लाख रुपये तक 1000 रुपये व उससे अधिक पर 0.1 फीसदी व अधिकतम 15 लाख रुपये स्टांप देयता होगी। महाराष्ट्र में यह व्यवस्था 1 मई, 2006 से लागू है।
 
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