विधानसभा सत्र में विधायकों के लिए स्थिति तब शर्मनाक हो गई जब अध्यक्ष ने उन्हें सदन में पान मसाला न खाने और इधर-उधर न थूकने की सलाह दे डाली।
मौका था राज्य में तंबाकू वाले पान मसाले की हो रही बिक्री पर रोक लगाने की। इस दौरान ही विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय ने विधायकों से कहा कि सदन में तंबाकू और बगैर तंबाकू वाले पान मसाले की बिक्री रोकने पर चर्चा हो रही है।
लेकिन, कुछ सदस्य सदन में पान मसाला खाते हैं और थूकते भी हैं। उन्होंने कहा कि सदन में कोई सदस्य पान मसाला न खाए।
बिक्री पर नहीं लगेगा प्रतिबंध
वहीं राज्य सरकार ने कहा है कि प्रदेश में बगैर तंबाकू वाले पान मसाले पर प्रतिबंध लगाने का कोई विचार नहीं है। इस मामले में राज्य सरकार केंद्र के दिशा निर्देशों का पालन कर रही है।
विधानसभा में सतीश महाना और सुनील कुमार सिंह यादव के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री की ओर से पंचायतीराज मंत्री कैलाश यादव ने कहा कि चार अक्तूबर 2012 को प्रदेश में तंबाकू या निकोटिन वाले पान मसाला, गुटखा का निर्माण, भंडारण और बिक्री प्रतिबंधित कर दी गई कर दी गई है।
महाना ने कहा कि घटिया तंबाकू का पान मसाला अभी भी प्रदेश में बिक रहा है। कमजोर तबके के लोग इनका ज्यादा सेवन करते हैं।
महाना ने कहा कि गुटखे के साथ छोटा गुटखा भी मिल रहा है। उन्होंने जानकारी चाही कि इनकी बिक्री रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई है।
केंद्र के दिशा निर्देशों पर काम करेगी सरकार
ब्रिकी पर रोक लगाने की रणनीति पर जवाब देते हुए सत्ता पक्ष के मंत्री ने बताया कि इसके लिए सभी मंडलों में छापे मारे गए हैं और माल जब्त किया गया है।
डॉ. अरुण कुमार ने स्कूलों, कॉलेजों के पास तंबाकू उत्पादों के बिकने की बात कही। इस पर मंत्री ने कहा कि इनकी बिक्री पर रोक लगाई जाएगी।
बसपा के नीरज मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार चाहे तो अपने स्तर पर सभी प्रकार के पान मसालों पर रोक लगा सकती है। क्या सरकार तंबाकू रहित गुटखा प्रतिबंधित करने पर विचार करेगी ?
मंत्री ने कहा कि यदि भारत सरकार के नियमों में बदलाव होगा तो उसे प्रदेश में लागू किया जाएगा।