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यूपी: अलग-अलग तरीके के बुखारों को लेकर हरकत में आई सरकार, दवाओं के साथ अलग से ओपीडी चलाने के निर्देश

Sat, 29 Aug 2026 06:48 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Flu in UP: यूपी में अलग-अलग तरह के बुखारों ने अपने पैर पसार लिए हैं। इस पर सरकार हरकत में आ गई है। डिप्टी सीएम ने इसको लेकर निर्देश भी जारी किए हैं। 
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प्रदेश में बढ़ रहे हैं बुखार के मामले। - फोटो : एआई द्वारा जनित।
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विस्तार
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प्रदेश में फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट है। बुखार के मरीजों के लिए अलग से काउंटर बनाने, भर्ती के लिए वार्ड तैयार रखने और दवाओं के पुख्ता इंतजाम रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदेश में अब तक इंफ्लुएंजा ए (एच1एन1) यानी स्वाइन फ्लू के 551 मरीज मिले हैं।

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प्रदेश में मौसमी फ्लू और स्वाइन फ्लू के मरीज 57 जिलों में मिले हैं। इसकी चपेट में ज्यादातर एनसीआर क्षेत्र के जिले हैं। अब तक मिले कुल मरीजों में 50 फीसदी तीन जिलों में हैं। इसमें गौतमबुद्ध नगर में 189, मेरठ में 54, गाजियाबाद में 32 केस हैं। इसी तरह मुजफ्फरनगर में 11 और बुलंदशहर में 10 केस मिले हैं। लखनऊ में 113 केस सामने आए हैं। हालांकि यहां अधिक केस होने की मूल वजह विभिन्न जिलों से रेफर होकर मरीजों का आना बताया जा रहा है। 

शनिवार सुबह उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अपर मुख्य सचिव सहित सभी विभागीय अधिकारियों, चिकित्सा संस्थानों एवं अस्पतालों के अधीक्षकों व सीएमओ के साथ बैठक की। पूरी स्थिति की समीक्षा की। निर्देश दिया कि सभी मरीजों को निशुल्क उपचार एंव जांच की व्यवस्था दी जाए। बुखार के मरीजों के लिए अलग से काउंटर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में ओसेल्टामिविर (टैमीफ्लू), ऑक्सीजन, नेबुलाइजर, ऑक्सीजन मास्क और ब्रोंकोडायलेटर्स सहित अन्य चीजों का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए। यदि मरीजों की संख्या बढ़ती है तो डॉक्टर और अन्य कर्मियों का ड्यूटी का समय बढ़ा दिया जाए। चिकित्सा संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया कि आरटीपीसीआर जांच के लिए पर्याप्त किट की व्यवस्था रखी जाए। निजी मेडिकल कॉलेजों को भी व्यवस्था रखने का निर्देश दिया जाए।

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बुखार वाले मरीजों के लिए अलग से चलेगी ओपीडी

फ्लू के मरीजों को राहत देने के लिए की गई तैयारी की समीक्षा करते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने निर्देश दिया कि बुखार वाले मरीजों के लिए पंजीयन, उपचार के लिए ओपीडी और भर्ती करने के लिए अलग से वार्ड बनाया जाए।

बैठक में अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने बताया कि इंफ्लुएंजा ए (एच1एन1) मरीजों को चार श्रेणी में बांट कर इलाज की व्यवस्था बनाई गई है। इसमें गंभीर मरीजों को ए, अन्य को बी1, बी2 और सी वर्ग में बांट कर उपचार किया जा रहा है। ऐसे में उप मुख्यमंत्री ने हर जिले के अधीक्षक से अब तक की गई तैयारी की जानकारी ली। 

निर्देश दिया कि अस्पतालों में सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षणों के साथ भर्ती सभी गंभीर मरीजों की फ्लू जांच सुनिश्चित की जाए। इन्फ्लुएंजा-लाइक इलनेस और सांस संबंधी संक्रमण वाले मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों में लक्षण पाए जाने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय से एंटीवायरल दवाएं शुरू की जाएं। गंभीर मरीजों के उपचार के लिए हर जिले में जिला एवं संयुक्त अस्पताल स्तर पर चार से छह आइसोलेशन बेड तैयार रखा जाए।
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घबराएं नहीं, बुखार हो तो आशा या एएनएम को बताएं

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि बुखार होनने पर घबराएं नहीं। अपने गांव की आशा अथवा एएनएम को जानकारी दें। आसपास के अस्पताल में पहुंचे और जांच कराएं। प्रदेश सरकार की ओर से सभी स्वास्थ्य इकाइयों में उपचार की पुख्ता व्यवस्था की गई है। सभी अस्पतालों में निशुल्क उपचार, जांच और दवा की व्यवस्था है।

नेपाल सीमा से लगे जिलों में विशेष सतर्कता
उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग को इन क्षेत्रों में फ्लू एवं बुखार के मामलों की प्रभावी निगरानी करने को कहा गया है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर एवं महराजगंज और गोरखपुर के सभी अस्पतालों को अलर्ट कर दिया जाए। नेपाल अथवा उत्तर प्रदेश से आने वाले प्रत्येक मरीज को तत्काल चिकित्सकीय सहायता और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ने अधिकारियों को अस्पतालों में मास्क, हाथों की स्वच्छता और खांसी के शिष्टाचार के प्रति मरीजों एवं तीमारदारों को जागरूक करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है और फ्लू की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
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