उन्होंने कहा कि 10 जुलाई को की गई गुमनाम शिकायत की पुष्टि 28 अगस्त को हो गई थी, फिर भी सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि भाजपा को मिले चंदे के आरोपों की जांच भी जरूरी है। डीएचएफएल सेबी में रजिस्टर्ड नहीं है और असुरक्षित है।
कर्मचारियों के 99 प्रतिशत फंड को निर्धारित नियमों के खिलाफ जाकर तीन निजी कंपनियों में निवेश किया गया। इसमें डीएचएफएल में अकेले 65 प्रतिशत राशि निवेश की गई। इसकी जिम्मेदारी ऊर्जा मंत्री को खुद लेनी चाहिए।