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श्रम कानूनों को स्थगित करना आपत्तिजनक और अमानवीय: अखिलेश यादव

Fri, 08 May 2020 09:42 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने श्रम कानूनों को स्थगित कर मजदूरों के शोषण के रास्ते खोलने और श्रमिकों के खिलाफ साजिश के लिए प्रदेश की भाजपा सरकार से इस्तीफा मांगा है।

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उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार कोरोना संकट का इस्तेमाल अपने व आरएसएस के पूंजीघरानों को संरक्षण देने और गरीब, दलित, पिछड़ों व समाज के कमजोर वर्ग के लोगों की जिंदगी में और ज्यादा परेशानियां पैदा करने पर उतारू हो गई है। भाजपा सरकार की जनविरोधी हरकतों से जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।

अखिलेश ने शुक्रवार को कहा कि भाजपा सरकार ने अध्यादेश के जरिये मजदूरों को शोषण से बचाने वाले श्रम कानूनों के अधिकांश प्रावधानों को तीन साल के लिए स्थगित कर दिया है। यह बेहद आपत्तिजनक और अमानवीय है। यह विस्थापन और बेरोजगारी के शिकार श्रमिकों को अब पूरी तरह मालिकों की शर्तों पर काम करने के लिए विवश किये जाने की साजिश है।
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भाजपा को गरीब की नहीं, पूंजीपतियों के हितों को बचाने की चिंता है। श्रमिकों को संरक्षण न दे पाने वाली भाजपा सरकार को तुरंत त्यागपत्र दे देना चाहिए।

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किसानों व जनता पर अत्याचार

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने महंगाई की मार बढ़ाने के लिए आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर बाइक से लेकर ट्रक तक पर ज्यादा टोल टैक्स बढ़ा दिया है। नोएडा अथॉरिटी ने पानी की दरों में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि कर दी गई है। पेट्रोल-डीजल पर केंद्र सरकार ने सेस और अतिरिक्त डयूटी बढ़ा दी तो यूपी सरकार ने अतिरिक्त वैट लगा दिया। यह किसानों और जनता पर अत्याचार है।
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