योगी सरकार के पहले बजट में सेहत दुरुस्त रखने के लिए 64.43 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया। बजट में जहां पूर्ववर्ती सरकार की योजनाओं के लिए जरूरत के मुताबिक कम रकम दी गई वहीं, सिविल अस्पताल, केजीएमयू और एसजीपीजीआई को कम धनराशि मिली है।
सिविल अस्पताल के विस्तार को 19 करोड़ रुपये मिले
बजट में मिले 19 करोड़ से सिविल अस्पताल में सौ बेड की नई ओपीडी का निर्माण, ऑपरेशन थिएटर, वार्ड और संसाधनों की खरीद की जानी है। पुरानी ओपीडी की आधी बिल्डिंग को तोड़कर बनाया जाना है।
विशिष्ट सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। लगभग तीन मंजिला की एक इमारत में मरीजों को सारी सुविधाएं होंगी उपलब्ध। नई ओपीडी के विस्तार से हजारों मरीजों को लाभ मिलेगा। मरीजों को भटकना की जगह एक ही जगह इलाज मिलेगा।
पिछली सरकार में 426 करोड़ की बनी थी योजना
सिविल अस्पताल के विस्तार के लिए पूर्ववर्ती सपा सरकार में एक हजार बेड की नई ओपीडी बनानेे की योजना थी। इसके लिए 426 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।
हालांकि बाद में बजट कम कर 150-200 करोड़ करने की योजना बनाई थी। अधिकारियों के मुताबिक वर्तमान सरकार के इस बजट से पुरानी भवनों को तोड़ने और उसका नक्शा ही तैयार कराया जा सकेगा। हालांकि आवास विकास से नक्शा पास हो चुका है। इसमें पुरानी ओपीडी के कमरा नंबरा एक से चौदह तक को तोड़ा जाएगा। इसके बाद यहां 14 कमरों की ओपीडी बनेगी।
केजीएमयू के निर्माण पर 9 करोड़ होंगे खर्च
महामारी आदि के नियंत्रण के लिए प्रयोशाला नेटवर्क की स्थापना के लिए 2.79 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत मानव शक्ति की विकास योजनाओं के लिए पांच करोड़ रुपये और शेष वेतन के लिए दिए जाएंगे। इस योजना की शुरुआत के लिए खुद सरकार की ओर से बजट जारी किया गया है।