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आपकी जेब काटने में पीछे यूपी भी नहीं!

Sun, 18 Jan 2015 09:23 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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अगर केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर आम उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत में सेंध लगाकर हमारी जेब काट रही है तो यूपी सरकार और आगे है। एक्साइज ड्यूटी लगातार बढ़ाकर केंद्र जहां प्रति लीटर पेट्रोल पर 17.48 रुपये कमा रहा है तो वहीं वैट व सरचार्ज लगाकर यूपी सरकार 17.64 रुपये कमा रही है।
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डीजल पर भी यूपी सरकार 9.29 रुपये अपनी जेब में डाल रही है। यही नहीं, पड़ोसी राज्यों में यूपी ही ऐसा राज्य हैं, जहां पेट्रोल-डीजल सबसे महंगा मिल रहा है। दिल्ली से ही तुलना करें तो हम एक लीटर पेट्रोल के लिए करीब 7 रुपये और डीजल के लिए पांच रुपये ज्यादा चुकाते हैं। कारण स्पष्ट है। यूपी में अन्य राज्यों की तुलना में पेट्रोल व डीजल पर वैट व सरचार्ज यानी स्थानीय टैक्स ज्यादा है।

दिल्ली पेट्रोल पर 20 फीसदी टैक्स लेती है तो यूपी 26.80 फीसदी। डीजल पर टैक्स दिल्ली में 12.50 फीसदी है तो यूपी में 17.48 फीसदी। साफ है, अगर यूपी सरकार टैक्स कम करे तो उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दे सकती है।
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सीमावर्ती जिलों में बंद हो रहे पेट्रोल पंप

पेट्रोल व डीजल के दाम में पड़ोसी राज्यों से भारी अंतर के चलते दिल्ली और हरियाणा से सटे पश्चिम के जिलों में इसकी तस्करी बढ़ गई है। नोएडा व गाजियाबाद में रहने वाले लोग दिल्ली व हरियाणा से ही पेट्रोल व डीजल भराते हैं क्योंकि वहां यूपी से सस्ता मिलता है।

इससे कई पेट्रोल पंपों को भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। कई पेट्रोल पंप तो बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं। यूपी पेट्रोल डीलर ट्रेडर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वीएन शुक्ला कहते हैं कि दिल्ली, हरियाणा व पंजाब से यहां टैक्स ज्यादा है। इसलिए फायदे के चक्कर में व्यावसायिक वाहनें भी इन्हीं राज्यों से तेल भरवाती हैं।

मुजफ्फरनगर-शामली पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिलेश गुप्ता बताते हैं कि सीमावर्ती क्षेत्र के यूपी के कई पेट्रोल पंप तो बंद हो चुके हैं। पानीपत व करनाल में सीमा से सटे तीन-चार किमी के अंदर 15 से 20 पंप खुल गए हैं।

तस्करी बढ़ गई है। तस्कर एक ट्रैक्टर ट्रॉली में सात-आठ ड्रम लेकर जाते हैं और वहां से तेल भराकर ले आते हैं। इसके बाद यह तेल सीमा पर गुमटी लगाकर सस्ते दामों में बेचते हैं। इससे करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

पड़ोसी राज्यों में जानें पेट्रोल-डीजल का दाम

यूपी में पेट्रोल की कीमत 53.20 रुपए और डीजल के दाम 65.83 रुपए। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 48.26 और डीजल की कीमत 58.91 रुपए। वहीं हरियाणा पेट्रोल के लिए 59.30 रुपए और डीजल को 48.11 रुपए में खरीदता है। पंजाब पेट्रोल के लिए48.07 रुपए और डीजल के लिए 65.22 रुपए चुकाता है। चंडीगढ़ पेट्रोल के लिए 59.68 रुपए और डीजल के लिए 47.87 रुपए चुका रहा है। उत्तराखंड में पेट्रोल की कीमत 61.95 रुपए और डीजल की कीमत 53.24 रुपए है। राजस्‍थान में पेट्रोल 63.65 रुपए और डीजल की कीमत 52.71 रुपए है। ये कीमत प्रति लीटर पेट्रोल और डीजल की है।

अगर टैक्स की बात करें तो यूपी पेट्रोल पर 26.80 रुपए और डीजल पर 17.48 रुपए टैक्स लगा रही हैं। हरियाणा पेट्रोल पर 20.50 रुपए और डीजल पर 12.25 रुपए टैक्स लगा रहा है। दिल्ली में पेट्रोल पर 20 रुपए और डीजल पर 12.50 रुपए टैक्स लगाता है। उत्तराखंड में पेट्रोल पर 23.25 रुपए और डीजल पर 17.50 रुपए टैक्स लगता है।

35 रुपये तो ले लेती हैं दोनों सरकारें

हम पेट्रोल व डीजल के लिए जितना दाम चुकाते हैं, उसमें से आधा तो केंद्र व राज्य सरकार की झोली में चला जाता है। लखनऊ में पेट्रोल 65.83 रुपये है। इमसें केंद्र 17.34 रुपये तो यूपी सरकार 17.64 रुपये ले लेती है। यानी 34.98 रुपये टैक्स में चला जाता है। केंद्र ने नवंबर से अब तक 4 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर पेट्रोल पर अपनी कमाई 7.75 रुपये बढ़ा चुकी है। जबकि डीजल पर 6.50 रुपये।
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यूपी सरकार टैक्स घटा दे तो भी कम नहीं होगी कमाई

विशेषज्ञों का मानना है कि यूपी सरकार अपने यहां भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम कर ले तो इससे उसकी कमाई कम नहीं होगी। बल्कि टैक्स कम होने से प्रदेश में पेट्रोलियम पदार्थों की बिक्री बढ़ जाएगी।

यूपी में डीजल महंगा होने के कारण ट्रांसपोर्ट वाले दिल्ली से ही ट्रक का टैंक फुल करके चलते हैं। वे यूपी में तेल लेते ही नहीं हैं। टैक्स कम होने पर बिक्री बढ़ेगी तो टैक्स का घाटा सरकार को नहीं होगा। तस्करी भी रोक लगेगी जिससे राजस्व बढ़ेगा।

जानकार मानते हैं कि अलग-अलग राज्यों में टैक्स की दर एक समान तभी हो सकती है जब पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाया जाए। इससे देशभर में एक ही मूल्य पर पेट्रोल व डीजल बिक सकेगा।

पश्चिम यूपी की पेट्रोल पंप डीलर एसोसिएशन एक समान रेट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दाखिल कर रही है। बिजनौर पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह कहते हैं कि यदि यह पीआईएल स्वीकार हो गई और इसमें निर्णय उन लोगों के पक्ष में आ गया तो इससे सभी को राहत मिलेगी।
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