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बड़ी खुशखबरीः यूपी सरकार ने हजारों संविदा कर्मियों को किया नियमित

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संविदा कर्मियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता वाली प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को एक अहम फैसला करते हुए मार्च 1996 तक नियुक्त दैनिक वेतन, वर्कचार्ज व संविदा कर्मियों की नौकरी पक्की करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी।
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इसी के साथ सरकार ने 2017 के विधानसभा चुनाव के पहले कर्मचारियों की एक बहुत पुरानी मांग मान ली है। इस फैसले से करीब 5000 कर्मचारी फायदा पाएंगे। इससे सरकार पर करीब 90 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्यय भार आएगा।

बताते चलें जून 1991 तक नियुक्त दैनिक वेतन, वर्कचार्ज व संविदा कर्मी विनियमित हो चुके हैं। इसके बाद सरकार ने बिना अनुमति लिए इस तरह की नियुक्तियों पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद नियुक्तियां होती रहीं।
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कर्मचारी संगठन ऐसे कर्मियों को विनियिमत करने की अर्से से मांग कर रहे थे। अब कैबिनेट ने मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की संस्तुतियों पर मुहर लगाते हुए राजकीय विभागों, स्वशासी संस्थाओं, सार्वजनिक उपक्रमों, निगमों, स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरणों व जिला पंचायतों आदि में नियुक्त ऐसे कर्मियों के विनियिमतीकरण को मंजूरी दे दी है।

हालांकि विनियमित वही कर्मी होंगे जो नियुक्ति के समय भर्ती के लिए तय निर्धारित अर्हता पूरी करते थे। ‘अमर उजाला’ ने पांच अगस्त के अंक में ही मुख्य सचिव समिति की संस्तुतियों का खुलासा कर सरकार के निर्णय का संकेत कर दिया था।
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नौकरी पर रखने वाले दंडित होंगे

इस फैसले की कड़ी में कैबिनेट ने दैनिक, वर्कचार्ज व संविदा पर नियुक्त कर्मियों को तो विनियमित करने को हरी झंडी दे दी है लेकिन शासन की अनुमति के बिना इनकी नियुक्ति करने वाले कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई का भी फैसला किया है।

कैबिनेट ने तय किया है कि शासन की पूर्व स्वीकृति के बिना तदर्थ, संविदा, नियत वेतन, दैनिक वेतन व वक्रचार्ज आदि केरूप में नियुक्तियां किए जाने के कृत्य को दंड की श्रेणी में माना जाएगा।

इस प्रकार से नियुक्त किए गए कार्मिकों को हुए भुगतान की वसूली नियुक्ति करने वाले अधिकारी के वेतन व अन्य देयों से की जाएगी।

इस फैसले से ये बाहर

विनियमितीकरण में सीजनल संग्रह अमीन,  सीजनल अनुसेवक, उद्यान विभाग, कृषि विभाग, कृषि शिक्षा विभाग के अंतर्गत सीजनल कार्य के लिए लगाए गए कार्मिक, मनरेगा, आंगनबाड़ी, आशा बहू, होमगार्ड स्वयंसेवक, प्रांतीय रक्षक दल, शिक्षा मित्र, किसान मित्र, व केंद्र तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के अधीन मानदेय या अन्य आधार पर रखे गए कर्मचारी शामिल नहीं होंगे।

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