- जिले में कई दवा कारोबारी केवल कागजों में होलसेल लाइसेंस लेकर कारोबार कर रहे हैं।
- गोदाम और दुकान का वास्तविक पता नहीं होता।
- न बैनर, न बोर्ड, न स्थानीय लोगों को जानकारी होती।
- माल सीधे गाड़ियों से मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाया जाता है।
- 40 रुपये में खरीदा गया कफ सिरप 100 से 120 रुपये में बेचा जाता है।
- मुनाफा दोगुने से अधिक होने के कारण नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।
जल्द ही होगी कई और कार्रवाई
औषधि अनुज्ञापन अधिकारी मुकेश जैन का कहना है कि कोडीन सिरप के अवैध सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए टीमें लगी हुई हैं। प्रदेश मुख्यालय से मिल रहे इनपुट के आधार पर औचक निरीक्षण किया जा रहा है। मंडल में सिर्फ तीन ही औषधि निरीक्षक होने के कारण अधिकारियों की कमी है। जल्द ही कई और कार्रवाई की जाएगी।