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UP: कोडीन की सप्लाई चेन तोड़ने में जुटा एफएसडीए, 12 संदिग्ध फर्में रडार पर, सीमावर्ती जिलों में बढ़ी चौकसी

Wed, 31 Dec 2025 07:39 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, गोंडा

सार

कोडीन युक्त कफ सिरप मामले में एफएसडीए की टीम ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। मार्गोलिस्ट एंड रोमर फार्मास्युटिकल के खिलाफ एफआईआर की तैयारी है। वहीं, 12 संदिग्ध फर्मे रडार पर हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध बिक्री व संभावित तस्करी पर लगाम लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। जिले में 12 अन्य संदिग्ध फर्मों को चिह्नित कर उनके खिलाफ गोपनीय जांच तेज कर दी गई है। लखनऊ मुख्यालय से मॉनीटरिंग की जा रही है।

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एफएसडीए की कार्रवाई के केंद्र में मेडिकल कॉलेज के सामने स्थित छेदीपुरवा क्षेत्र की थर्ड पार्टी फर्म मार्गोलिस्ट एंड रोमर फार्मास्युटिकल प्राइवेट लिमिटेड है। यहां से बड़ी मात्रा में कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद होने के बाद औषधि प्रशासन ने फर्म का लाइसेंस निरस्त कर दिया है। नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

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बुधवार को औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा के नेतृत्व में एफएसडीए की एक टीम श्रावस्ती जिले में पहुंची। कई संदिग्ध फर्मों के क्रय-विक्रय और आपूर्ति से जुड़े अभिलेखों की गहन जांच की गई। सीमावर्ती जिलों में तस्करी की आशंका को देखते हुए निगरानी और सख्त कर दी गई है। बताया जा रहा है कि मंडल मुख्यालय से सभी जिलों में अवैध चेन के माध्यम से कफ सिरप की आपूर्ति की जाती थी।

लखनऊ से होती थी सप्लाई, गोंडा से आगे भेजा जाता था सिरप
सूत्रों के अनुसार, कोडिन युक्त कफ सिरप की आपूर्ति लखनऊ की एक एजेंसी से की जाती थी। गोंडा स्थित थर्ड पार्टी फर्म में बड़ी मात्रा में सिरप जमा कर वहां से गाड़ियों के माध्यम से गोंडा सहित मंडल के अन्य जिलों में सप्लाई की जाती थी। जब औषधि निरीक्षक ने अचानक छापा मारा तो फर्म संचालक इसकी खरीद, बिक्री और आपूर्ति से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। दस्तावेजों के अभाव में अवैध सप्लाई चेन के तहत तस्करी की आशंका जताई जा रही है। इसी आधार पर लाइसेंस निरस्त करते हुए जवाब मांगा गया है।

12 फर्मों की गोपनीय जांच में खुल सकते हैं कई राज
औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा ने बताया कि जिले में करीब 12 ऐसी फर्मों की पहचान की गई है, जिनके रिकॉर्ड संदिग्ध हैं। इन फर्मों के गोदाम, स्टॉक रजिस्टर, परिवहन दस्तावेज और बिक्री का सत्यापन कराया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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ऐसे चलता है कोडिन कफ सिरप का नेटवर्क

- जिले में कई दवा कारोबारी केवल कागजों में होलसेल लाइसेंस लेकर कारोबार कर रहे हैं।
- गोदाम और दुकान का वास्तविक पता नहीं होता।
- न बैनर, न बोर्ड, न स्थानीय लोगों को जानकारी होती।
- माल सीधे गाड़ियों से मेडिकल स्टोरों तक पहुंचाया जाता है।
- 40 रुपये में खरीदा गया कफ सिरप 100 से 120 रुपये में बेचा जाता है।
- मुनाफा दोगुने से अधिक होने के कारण नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।

जल्द ही होगी कई और कार्रवाई
औषधि अनुज्ञापन अधिकारी मुकेश जैन का कहना है कि कोडीन सिरप के अवैध सप्लाई चेन को तोड़ने के लिए टीमें लगी हुई हैं। प्रदेश मुख्यालय से मिल रहे इनपुट के आधार पर औचक निरीक्षण किया जा रहा है। मंडल में सिर्फ तीन ही औषधि निरीक्षक होने के कारण अधिकारियों की कमी है। जल्द ही कई और कार्रवाई की जाएगी।
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