शर्मिला की मौत की खबर से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उसकी मां दुर्गावती बदहवास हो गईं और बार-बार अपनी बेटी को पुकारती रहीं। पिता पंचराम, जो रोजगार के सिलसिले से हरियाणा में रहते हैं, को सूचना मिलते ही तुरंत गांव के लिए रवाना हो गए। गुजरात में काम कर रहे भाई रोहित कुमार को भी खबर दे दी गई है। शर्मिला परिवार की एक बड़ी उम्मीद थी। पढ़ाई के साथ-साथ वह घर की जिम्मेदारियां उठाने का सपना देख रही थी। सीआईएसएफ में उसके चयन की खबर से परिवार को लगा था कि उनके दिन अब बदलेंगे, लेकिन एक सड़क हादसे ने सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया।