अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य कोरोना के कारण गंभीर स्थिति से जूझ रहा है तो सीएम हेल्पलाइन 1076 आपके लिए मददगार साबित हो सकती है। हेल्पलाइन पर बेड न मिलने और ऑक्सीजन या वेंटिलेटर की समस्या बताए जाने पर डीएम को समुचित व्यवस्था करने के लिए फोन किया जा रहा है। इतना ही नहीं जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे इन रोगियों के परिवारीजनों से मदद मिली कि नहीं, इस बाबत फीडबैक भी लिया जा रहा है।
सरकार का दावा है कि प्रदेश में ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति है। इसके साथ ही वेंटिलेटर और अन्य जीवन रक्षक उपकरणों के संचालन के लिए पर्याप्त टेक्नीशियन नियुक्त करने के निर्देश भी दे दिए गए हैं। ऐसे में गंभीर रोगियों को इलाज की दिक्कत नहीं आनी चाहिए। इसलिए इस तरह की दिक्कत संबंधी फोन कॉल सीएम हेल्पलाइन पर आने पर सरकार गंभीर रुख अपना रही है।
सीएम हेल्पलाइन का काम देख रहे यूपी डेस्को के अधिकारी बताते हैं कि हेल्पलाइन पर रोजाना 40 से 50 हजार फोन कॉल आती हैं। अधिकांश कॉल कोविड संक्रमण से संबंधित ही होती हैं। इनमें से दो से तीन हजार कॉल ऐसी होती हैं, जिनमें रोगी को तत्काल मदद दिया जाना जरूरी होता है। यह इमरजेंसी बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर से संबंधित होती है। ऐसे मामलों में तत्काल जिलों में स्थित कोविड कमांड सेंटर को सूचित किया जाता है। साथ ही संबंधित डीएम को ई-मेल के माध्यम से जानकारी दी जाती है।
इसके बावजूद मदद न मिलने की बात रोगी या उसके परिवारीजन सीएम हेल्पलाइन को बताते हैं, तो तत्काल केस मुख्यमंत्री कार्यालय को संदर्भित कर दिया जाता है। वहां से सीधे डीएम से फोन पर बात करने की व्यवस्था की गई है। बताते हैं कि यह जिम्मेदारी सीएम हेल्पलाइन का काम देख रहे मुख्यमंत्री के सचिव आलोक कुमार को दी गई है।
सीएम हेल्पलाइन से जुड़े यूपी डेस्को के सूत्रों के मुताबिक, रविवार को सीएम कार्यालय से जिलाधिकारियों को इस तरह की 36 कॉल और शनिवार को 43 कॉल की गईं। इतना ही नहीं इस आधार पर डीएम और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के काम का मूल्यांकन भी किया जा रहा है जिसका असर भविष्य में होने वाली उनकी तैनाती पर भी दिखेगा।