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साढ़े पांच लाख लोगों को नौकरी दिलाएगी यूपी सरकार

Tue, 08 Sep 2015 12:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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नौकरी के लिए प्रत्येक वर्ष विदेश पलायन कर जाने वालों में यूपी से सबसे ज्यादा करीब 2.70 लाख लोग होते हैं। अब यह संख्या बढ़ाकर 5.40 लाख की जाएगी। साथ ही एक से दो लाख रुपये की जगह सिर्फ  20 से 30 हजार रुपये में ही विदेश में नौकरी दिलाई जाएगी।
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बेरोजगारों को योग्यता के हिसाब से प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि वे उचित वेतन पा सके। इस काम को रिक्रूटमेंट एजेंसी के रूप में यूपी वित्त एवं विकास निगम (यूपीएफसी) आगे बढ़ाएगा।

यह बात यहां यूपीएफसी के प्रबंध निदेशक व कानपुर के मंडलायुक्त इफ्तिखारुद्दीन ने कही। वह सोमवार को इंदिरा प्रतिष्ठान में विदेश जाने वाले लोगों को प्रशिक्षित करने व रोजगार दिलाने में अहम भूमिका निभाने वाले अफसरों के लिए आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
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निदेशक ने विदेश जाने वाले श्रमिकों का दर्द साझा करते हुए कहा कि इनमें  ज्यादातर वे होते हैं जिन्हें अपने देश में कोई हजार रुपये की नौकरी नहीं देना चाहता। दूसरा, ऐसे तमाम लोगों को विदेश में नौकरी पर जाने के लिए 10 प्रतिशत महाजनी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ता है। यह ब्याज दस रुपये सैकड़ा प्रति माह के हिसाब से चलता है। उन्हें 2-3 लाख रुपये दलालों के पीछे खर्च करना पड़ता है। कई बार धोखा तक खाना पड़ता है।

'दो-दो साल तक नौकरी कर कर्ज ही अदा करते रहते हैं'

इनमें भी ज्यादातर अकुशल श्रमिक होते हैं जिन्हें अपनी योग्यता व मेहनत के हिसाब से वहां पैसा नहीं मिलता। नतीजा ये होता है कि विदेश जाकर नौकरी करने वाले दो-दो साल तक कर्ज ही अदा करते रहते हैं। वह इस व्यवस्था को बदलना चाहते है।

कहा कि यूपीएफसी को वह छह माह में देश में पहला स्थान दिलाएंगे। अन्य देशों को कुशल मैनपावर मुहैया कराने के लिए साफ-सुथरी व्यवस्था बनाएंगे।

दलाली का अड्डा न बन जाए यूपीएफसी
मौके पर इफ्तिखारुद्दीन ने एक बड़ी चिंता साझा की। कहा कि वह अपने जीवन में पहली बार घबरा रहे हैं। घबराहट इस बात की है कि कहीं उनके क्षेत्रीय केंद्र भी आगे चलकर आरटीओ कार्यालय की तरह बदनामी व दलाली के अड्डे न बन जाएं। अभी लोग 1-2 लाख खर्च कर विदेश जाते हैं, यहां सेंटर खुले तो दलाल 25-50 हजार में धंधा शुरू कर दें।

उन्होंने अफसरों से कहा कि तकनीक का ऐसा इस्तेमाल करें कि इस केंद्र की व्यवस्था में बाहरी हस्तक्षेप व ‘पिक एंड चूज’ की गुंजाइश न रह जाए। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि यूपीएफसी के कर्मी भी इसमें तिमड़म न लगा पाएं। ऐसा इसलिए ताकि सरकार बदनाम न हो।
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ऐसे लोगों को विदेश भेजें जिन पर न उठे उंगली

एनआरआई विभाग के सलाहकार मधुकर जेटली ने कहा कि केंद्र ने रिक्रूटमेंट एजेंसी की मान्यता दे दी है। कहा कि अमेरिका, इंग्लैंड जैसे देशों में जहां ज्यादा तकनीकी व प्रोफेशनल जाते हैं वहीं खाड़ी देशों में मजदूर पेशा लोग। अब यह रिक्रूटमेंट एजेंसी विदेश की आवश्यकता पता कर उनके हिसाब से बेरोजगारों को ट्रेनिंग देगी। उन्हें कुशल बनाया जाएगा।

पासपोर्ट व अन्य जरूरी दस्तावेज मुहैया कराए जाएंगे। इससे उन्हें अपनी योग्यता के हिसाब से नौकरी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि रिक्रूटमेंट एजेंसी के जरिये ऐसे लोगों को भेजा जाए जिन पर विदेश में उंगली न उठाई जा सके। अनस्किल्ड महिलाओं को विदेश कदापि न भेजा जाए।

माइग्रेट रिसोर्स सेंटर भी बनाएंगे : सरन
प्रमख सचिव एनआरआई संजीव सरन ने कहा कि विदेश से यूपी में काफी पैसा आता है। इस लिहाज से प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है। विदेश जाने वाले लोग दलालों के चक्कर से बचें और सभी तरह की जरूरी सहयोग व सलाह व सुविधाएं मिलें इसके लिए एक माइग्रेट रिसोर्स सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
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