यूपी में बदलते मौसम के साथ ज्यादा बिजली पाने का सपना देखने वालों के लिए बुरी खबर है। बारिश कम होने से बिजली का उत्पादन घट गया है। बारिश थम जाने से प्रदेश में कृषि के लिए बिजली की मांग बढ़ने लगी है। सूखे की आशंका से पावर कॉर्पोरेशन भी हरकत में आ गया है।
उसने अतिरिक्त बिजली के इंतजाम के लिए माथापच्ची शुरू कर दी है। बीते दो-तीन दिनों में बिजली की मांग में एकाएक खासी बढ़ोतरी हुई और आने वाले दिनों में इसमें और इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
ट्रांसमिशन क्षमता न होने की वजह से दूसरे राज्यों से बिजली खरीदकर प्रदेश में लाना संभव नहीं हो पा रहा है। ऐसे में राज्य के बिजलीघरों का उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
पावर कॉर्पोरेशन अनपरा ‘डी’ की 500 और ललितपुर परियोजना की 660 मेगावाट क्षमता की इकाई को चलवाने की कोशिश में जुटा है ताकि शहरों के साथ ग्रामीण इलाकों को भी सिंचाई आदि के लिए जरूरत भर बिजली दी जा सके।
बढ़ गई बिजली की मांग
बारिश न होने से गर्मी और उमस बढ़ जाने से प्रदेश में बिजली की औसत मांग 13,500 मेगावाट तक पहुंच गई है । आने वाले दिनों में मांग के 14,000 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है जबकि उपलब्धता 12,000 से 12,500 मेगावाट के बीच ही है।
लगभग 6,200 मेगावाट बिजली केंद्र व दूसरे राज्यों से मिल रही है जबकि लगभग इतनी ही बिजली राज्य के सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बिजलीघरों से उत्पादित की जा रही है। शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं का कहना है कि गर्मी व उमस के कारण रात में कस्बों से लेकर शहरों तक बिजली आपूर्ति का जबरदस्त दबाव है।
जिलों से सूखे जैसे हालात की दुहाई देकर ग्रामीण इलाकों में सिंचाई के लिए भी बिजली देने का दबाव डाला जा रहा है। बिजली संकट की आहट भांपते हुए कॉर्पोरेशन प्रबंधन सक्रिय हो गया है। प्रबंध निदेशक एपी मिश्र ने मंगलवार को शक्ति भवन में वितरण और नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों के साथ बैठक करके शहरों और गांवों की आपूर्ति पटरी पर रखने को लेकर मंथन किया।
नियंत्रण कक्ष के अधिकारियों का कहना था कि ट्रांसमिशन कॉरिडोर उपलब्ध न होने से दूसरे राज्यों से अतिरिक्त बिजली लाने की गुंजाइश नहीं है। सूबे के बिजलीघरों का उत्पादन बढ़ाकर और बंद इकाइयों को चलाकर ही स्थिति संभाली जा सकती है।
अनपरा ‘डी’ की 500 मेगावाट की इकाई के 2 अगस्त तक तथा ललितपुर की 660 मेगावाट क्षमता की इकाई के 6 अगस्त तक चलने की उम्मीद है। अगर ये दोनों इकाइयां चल जाती हैं तो स्थिति नियंत्रण में रहेगी वरना आपात कटौती बढ़ानी पड़ेगी।