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यूपी: कुत्तों और जानवरों के काटने वाला हर तीसरा पीड़ित नाबालिग, कुत्ते के काटने की घटनाएं सबसे ज्यादा; खुलासा

Mon, 17 Nov 2025 10:07 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

Stray dogs in UP: जानवरों के काटने के इस अध्ययन में अगस्त 2024 से जुलाई 2025 के बीच प्लास्टिक सर्जरी विभाग में आए श्रेणी-3 के जानवरों के काटने से घायल 138 रोगियों को शामिल किया गया।
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यूपी में आवारा कुत्तों की समस्या। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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शहरी और ग्रामीण इलाकों में कुत्तों और अन्य जानवरों के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इनमें हर तीसरा पीड़ित नाबालिग निकल रहा है। हर चार में से तीन पीड़ित पुरुष होते हैं। केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में जानवरों के काटने के बाद घाव के इलाज के लिए आने वाले घायलों के विश्लेषण में ये निष्कर्ष सामने आए हैं। यह अध्ययन इंडियन जर्नल ऑफ प्लास्टिक सर्जरी में प्रकाशित भी हुआ है।

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अध्ययन में अगस्त 2024 से जुलाई 2025 के बीच प्लास्टिक सर्जरी विभाग में आए श्रेणी-3 के जानवरों के काटने से घायल 138 रोगियों को शामिल किया गया। श्रेणी-3 में जंगली जानवर और कुत्तों के काटने के गंभीर जोखिम वाले मामलों को रखा जाता है। इसमें रेबीज का जोखिम ज्यादा होता है और इलाज की जरूरत भी होती है। इन 138 रोगियों में 132 यानी 95.7 फीसदी मामले कुत्तों के काटने के थे। कुत्तों के अलावा अन्य मामले सियार के काटने के थे। कुल पीड़ितों में 103 पुरुष थे और इनमें 18 वर्ष से कम आयु वालों की तादाद 34.8 फीसदी थी। 61 फीसदी लोग ग्रामीण क्षेत्र से थे और 63.8 फीसदी घटनाएं दिन के समय हुई थीं।

83.3 फीसदी मामले आवारा जानवरों के

अध्ययन में यह भी देखा गया कि 83.3 फीसदी मामले आवारा जानवरों के काटने वाले थे। प्लास्टिक सर्जरी विभाग में आने के बाद ज्यादातर घायलों का घाव पूरी तरह ठीक हो गया और इसमें विशेष जटिलता नहीं हुई।

साबुन से घाव धोने से कम हो जाता है रेबीज का खतरा
केजीएमयू के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. डी. हिमांशु के मुताबिक अगर कुत्ते, सियार या बंदर जैसे जानवरों ने काटा है तो फिर घाव को तुरंत साबुन से धोना चाहिए। लगातार 15 मिनट तक साबुन से घाव धोने पर रेबीज का खतरा 60 फीसदी तक कम हो जाता है।
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वैक्सीन के साथ असरदायक है इम्युनोग्लोबलिन

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉ. विक्रम सिंह के मुताबिक रेबीज का वायरस जानवरों के लार में होता है, जो काटने के बाद इंसानों के शरीर में तेजी से फैल जाता है। संक्रमित व्यक्ति के मस्तिष्क पर इसका असर होता है। इसमें तीन से लेकर 12 सप्ताह तक का समय लगता है। इसलिए कुत्ते के काटने के बाद सबसे पहले इम्युनोग्लोबलिन का इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। इसके बाद रेबीज का टीका लगाया जाना चाहिए। 24 घंटे के अंदर इंजेक्शन लगवाना फायदेमंद रहता है। समयसीमा पार करने पर रेबीज से बचाव के खिलाफ टीका कम असरदार साबित होता है।

रेबीज से संक्रमण के लक्षण
खाना-पानी निगलने में कठिनाई, पानी से डर लगना, लार निकलना, बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, अनिद्रा, लकवा मार जाना

जानवर के काटने पर क्या करें
घाव को 15 मिनट तक साबुन से धुलें और जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाएं।

क्या न करें
काटे हुए स्थान पर मिर्च या अन्य सामग्री न बांधे, घाव ज्यादा होने पर भी टांके न लगवाएं।
 
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