अध्ययन में यह भी देखा गया कि 83.3 फीसदी मामले आवारा जानवरों के काटने वाले थे। प्लास्टिक सर्जरी विभाग में आने के बाद ज्यादातर घायलों का घाव पूरी तरह ठीक हो गया और इसमें विशेष जटिलता नहीं हुई।
साबुन से घाव धोने से कम हो जाता है रेबीज का खतरा
केजीएमयू के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. डी. हिमांशु के मुताबिक अगर कुत्ते, सियार या बंदर जैसे जानवरों ने काटा है तो फिर घाव को तुरंत साबुन से धोना चाहिए। लगातार 15 मिनट तक साबुन से घाव धोने पर रेबीज का खतरा 60 फीसदी तक कम हो जाता है।
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के डॉ. विक्रम सिंह के मुताबिक रेबीज का वायरस जानवरों के लार में होता है, जो काटने के बाद इंसानों के शरीर में तेजी से फैल जाता है। संक्रमित व्यक्ति के मस्तिष्क पर इसका असर होता है। इसमें तीन से लेकर 12 सप्ताह तक का समय लगता है। इसलिए कुत्ते के काटने के बाद सबसे पहले इम्युनोग्लोबलिन का इंजेक्शन दिया जाना चाहिए। इसके बाद रेबीज का टीका लगाया जाना चाहिए। 24 घंटे के अंदर इंजेक्शन लगवाना फायदेमंद रहता है। समयसीमा पार करने पर रेबीज से बचाव के खिलाफ टीका कम असरदार साबित होता है।
रेबीज से संक्रमण के लक्षण
खाना-पानी निगलने में कठिनाई, पानी से डर लगना, लार निकलना, बुखार, सिरदर्द, घबराहट या बेचैनी, अनिद्रा, लकवा मार जाना
जानवर के काटने पर क्या करें
घाव को 15 मिनट तक साबुन से धुलें और जल्द से जल्द वैक्सीन लगवाएं।
क्या न करें
काटे हुए स्थान पर मिर्च या अन्य सामग्री न बांधे, घाव ज्यादा होने पर भी टांके न लगवाएं।