विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति की रविवार को हुई बैठक में तय किया गया कि निजीकरण के विरोध में चल रहे ध्यानाकर्षण आंदोलन से उपभोक्ताओं को कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। 26 से 28 मई तक उपभोक्ताओं को साथ लेकर सभी जनपदों में आंदोलन चलाया जाएगा। 29 से कार्य बहिष्कार शुरू होगा। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों संजय सिंह चौहान, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय, पीके दीक्षित, सुहैल आबिद आदि ने कहा कि वे किसी भी कीमत पर उपभोक्ताओं को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहते हैं। यही वजह है कि छह माह से शांतिपूर्ण आंदोलन चला रहे हैं। वे सिर्फ निजीकरण का विरोध कर रहे हैं।
संघर्ष समिति के साथ कदमताल करेगा जूनियर इंजीनियर संगठन
राज्य विद्युत परिषद जूनियर इंजीनियर्स संगठन की केंद्रीय कार्यसमिति की रविवार को हुई बैठक में तय किया गया कि निजीकरण के मुद्दे पर वे संघर्ष समिति के साथ हैं। दोनों ने ही पूर्वांचल एवं दक्षिणाचंल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में काॅर्पोरेशन प्रबंधन को ध्यनाकर्षण नोटिस दिया है। आगे से निजीकरण के विरोध में होने वाले सभी कार्यक्रम, विरोध सभा, संपर्क और प्रेसवार्ता सहित अन्य आंदोलनात्मक कार्यक्रम संघर्ष समिति के साथ करेंगे। बैठक में संघ के अध्यक्ष संजय चौहान, कार्यकारी अध्यक्ष अवधेश कुमार यादव, महासचिव बलवीर सिंह यादव सहित अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। मालूम हो कि जूनियर इंजीनियर्स संगठन के साथ शनिवार को पाॅवर काॅर्पोरेशन के अध्यक्ष डाॅ. आशीष कुमार गोयल के साथ बैठक हुई थी। इस दौरान चर्चा थी कि जूनियर इंजीनियर्स संगठन आंदोलन से दूर रहेगा।
अभियंताओं के विभिन्न संगठनों ने कहा कि वे अस्पताल, रेलवे, पेयजल आपूर्ति सहित सभी आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं होने देंगे। काॅर्पोरेशन प्रबंधन के निर्देश पर जल निगम के टैंकरों में पेयजल भरे जाने की तैयारी अनावश्यक तौर पर आम जनता में भय का वातावरण बनाने के लिए की जा रही है, जिसका निहित उद्देश्य हड़ताल थोप कर निजीकरण करना है।
प्रबंधन की चाल से किया सावधान, जिलेवार बनाई कमेटी
संघर्ष समिति की बैठक में बाद विभिन्न ऊर्जा संगठनों को मिलाकर जिले स्तर पर कमेटी गठित कर दी गई है। इनको संदेश भेजकर आगाह किया गया है कि काॅर्पोरेशन प्रबंधन खुद जानबूझकर बिजली आपूर्ति में गड़बड़ी करा सकता है। ऐसे में सावधान रहें, क्योंकि पूर्वांचल और दक्षिणांचल की निविदा हासिल करने वाली कंपनियों के लोगों ने लखनऊ में डेरा डाल रखा है। यह भी चर्चा है कि उनका पॉवर काॅर्पोरेशन प्रबंधन से लगातार संपर्क है। कमेटियों को यह भी निर्देश दिया गया कि किसी तरह के उसकावे में न आएं। जब तक संगठन की केंद्रीय कमेटी का निर्देश न हो तब तक अनावश्यक तौर पर हड़ताल की स्थिति न पैदा होने पाए।