अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी से किया था गठबंधन
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उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों पर मतगणना जारी है। अब (रात साढ़े 10 बजे) तक 367 सीटों पर नतीजों का एलान हो चुका है और 36 सीटों पर राजनीतिक दलों की कशमकश चल रही है। हालांकि, अब तक यह तय हो चुका है कि योगी आदित्यनाथ जीत के रथ पर सवार होकर दूसरी बार उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने की तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने दो लड़कों की जोड़ी यानी अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के गठबंधन को पटखनी दे दी। गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा के सामने अखिलेश के किसी गठबंधन की यह पहली हार नहीं है। इससे पहले भी दो बार वह भाजपा को मात देने के मकसद से अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन कर चुके हैं। हालांकि, दोनों ही बार उन्हें सफलता हासिल नहीं हुई। इस रिपोर्ट में हम जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में सपा ने भाजपा को हराने के लिए किन-किन राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन किया और उसका नतीजा क्या रहा?
2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर पर सवार भाजपा पूरे देश में भगवा फहराने के अभियान पर थी। 2017 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव आए तो उसका सीधा मुकाबला अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी से था, जो सत्ता में थी। अखिलेश ने मोदी लहर की काट ढूंढने के लिए राहुल गांधी के साथ गठबंधन किया और दो लड़कों की जोड़ी का नारा दिया। हालांकि, जब चुनावों के नतीजों का एलान हुआ तो यूपी में भी प्रचंड मोदी लहर का असर नजर आया। भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने कुल 325 सीटें जीतीं, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन महज 47 सीटों पर ही सिमट गया।
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा के हाथों करारी शिकस्त झेलने के बाद सपा ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और कट्टर प्रतिद्वंद्वी बसपा से हाथ मिला लिया। जब अखिलेश यादव एक मंच पर मुलायम सिंह यादव और मायावती का मेलजोल कराते नजर आए तो राजनीतिक विशेषज्ञों को भी उत्तर प्रदेश में बड़े उलटफेर का अंदेशा होने लगा। उनका मानना था कि उत्तर प्रदेश का एमवाई (मुस्लिम-यादव) फैक्टर का तोड़ भाजपा के पास नहीं होगा, लेकिन नतीजों ने हर किसी को हैरान कर दिया। दरअसल, उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 64 पर भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने जीत हासिल की। वहीं, सपा-बसपा-रालोद का महागठबंधन कुल 15 सीटों पर ही सिमटकर रह गया और इसी के साथ 25 साल की दुश्मनी भुलाकर साथ आए सपा-बसपा एक बार फिर अलग हो गए।
अब बारी 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की थी। सपा ने इस बार बड़ी पार्टियों की जगह छोटे-छोटे राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन किया, जिनमें रालोद प्रमुख था। दो लड़कों की जोड़ी का नारा एक बार फिर जोर-शोर से उछाला गया। अखिलेश यादव ने तो 300 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा भी किया, लेकिन नतीजे एक बार फिर उनके लिए निराशाजनक रहे। उत्तर प्रदेश की कुल 403 विधानसभा सीटों में से भाजपा और उसके सहयोगियों की झोली में 274 सीटें जाती नजर आ रही हैं, जिनमें से पार्टी 250 सीटों पर अपनी जीत पक्की कर चुकी है। सपा गठबंधन को भले ही हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2017 के मुकाबले उसका प्रदर्शन बेहतर रहा। दरअसल, 2017 में सपा गठबंधन ने 47 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में पार्टी और उसके सहयोगियों को 124 सीटें मिलती दिख रही हैं।