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बीसलपुर : दांव पर दिग्गजों की प्रतिष्ठा, भाजपा व बसपा से ताल ठोक रहे कई बार जीते विधायक

Fri, 11 Feb 2022 12:18 PM IST
ishwar ashish राकेश कुमार, अमर उजाला, पीलीभीत

सार

मतदाता मुद्दों पर मुखर है। कहीं दल की बात है, तो कहीं दिल की बात। सियासी मिजाज की बात करें तो मतदाता कहते हैं, देश हित सर्वोपरि है। पर, यहां की सियासत कुछ ऐसी है कि जब वोट की बात आती है, तो लोग जाति और धर्म के आधार पर बंट जाते हैं।
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भाजपाः विवेक वर्मा, सपाः दिव्या गंगवार, बसपाः अनीस अहमद, कांग्रेसः शिखा पांडेय। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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बीसलपुर सीट पर अबकी तीन उम्मीदवार विरासत की सियासत को आगे बढ़ाने के लिए मैदान में हैं। दो प्रत्याशियों ने दल भी बदला है। पुराने संबंधों, जातिगत समीकरणों के साथ-साथ कहीं-कहीं स्थानीय मुद्दे भी उठ रहे हैं। एक तरफ से हिंदुत्व को हवा दी जा रही है, तो दूसरी ओर से अनुसूचित जाति और मुस्लिम का समीकरण बनाने की कोशिशें हो रही हैं। कुल मिलाकर मुकाबला दिलचस्प होने के आसार हैं।

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भाजपा विधायक रामसरन वर्मा ने बेटे विवेक वर्मा को उतारा है। रामसरन वर्मा भाजपा से 1991,1993, 2012 और 2017 में जीतेे। विवेक वर्मा मोदी और योगी सरकार के कामों के साथ अपने पिता की राजनीतिक विरासत के सहारे आगे बढ़ रहे हैं। अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू वर्ष 1996, 2002 और 2007 में लगातार तीन बार बसपा से विधायक बने। वर्ष 2017 में कांग्रेस के पाले में पहुंच गए थे।अबकी बार वह फिर से हाथी पर सवार हैं। रामलहर में मेनका गांधी को हराकर सांसद बने स्व. परशुराम गंगवार की बेटी दिव्या गंगवार सपा की उम्मीदवार हैं। वर्ष 2017 में वह बसपा से मैदान में उतरी थीं। पिता की सियासी विरासत और सपा के परंपरागत वोट बैंक के साथ वह चुनौती पेश कर रही हैं। निर्दलीय चुनाव लड़ चुके पुराने कांग्रेसी डॉ. नागेश पाठक की बहू शिखा पांडेय कांग्रेस की उम्मीदवार हैं। अपने ससुर की सियासी विरासत के सहारे वह मैदान में आई हैं। यानी इस सीट पर तीन उम्मीदवारों के लिए विरासत एक बड़ा सहारा है। चौथे उम्मीदवार अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू के पिता भी नगर पालिकाध्यक्ष रहे हैं। वह दलित-मुस्लिम के समीकरण के सहारे ताल ठोक रहे हैं।


मुद्दों पर मुखर हैं मतदाता :  मतदाता मुद्दों पर मुखर है। कहीं दल की बात है, तो कहीं दिल की बात। सियासी मिजाज की बात करें तो बारह पत्थर चौराहे के आनंद बाबू कहते हैं, देश हित सर्वोपरि है। पर, यहां की सियासत कुछ ऐसी है कि जब वोट की बात आती है, तो लोग जाति और धर्म के आधार पर बंट जाते हैं। आजमपुर बरखेड़ा के किसान जितेंद्र कुमार कहते हैं, बेशक किसानों की समस्याएं हैं, पर हमारे लिए पार्टी बड़ी है। स्थानीय मुद्दे छोटे हैं। अरविंद मिश्रा कहते हैं, मिजाज हिंदुत्ववादी है। पर, क्षेत्र की बात करें तो न विकास हुआ, न रोजगार मिला, लेकिन वोट के वक्त ये मुद्दे याद नहीं
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रहते। मोहल्ला दुबे निवासी राजेश कुमार शुक्ला कहते हैं, दावे कुछ भी हों, पर बेरोजगारी और महंगाई सबके सामने है। हालांकि, इस क्षेत्र में धार्मिक आधार पर कई बार मतों का बंटवारा देखा है। इस बार भी हवा दी जा रही है, पर मैं तो अपने दिल की बात को ही अहमियत दूंगा।

तीन दशक में दो दिग्गजों के मध्य हुई हार-जीत : अहम बात यह है कि बीसलपुर विधानसभा सीट 1991 से 2017 तक दो दिग्गजों की बीच ही रही। सात चुनावों में जनता ने चार बार रामसरन वर्मा को और तीन बार अनीस अहमद खां उर्फ फूल बाबू को चुना। चार बार कांग्रेस और एक बार जनता दल के खाते में यह सीट रही। सीट का सियासी मिजाज बदलता रहा है। अलबत्ता समाजवादी पार्टी अभी इस सीट पर नहीं जीती है।

2017 में किसे मिले कितने वोट
रामसरन वर्मा, भाजपा    1,03,498
अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू, कांग्रेस    62,502
दिव्या गंगवार, बसपा    45,338
(कांग्रेस और सपा का गठबंधन था और सपा ने उम्मीदवार नहीं उतारा था)
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क्षेत्र में विकास की गंगा बहाई

विधायक रामसरन वर्मा का कहना है कि ईमानदारी और मिला यश ही मेरी ताकत बना। बेटा भी इसी को आगे बढ़ाएगा। दस वर्ष में बीसलपुर में विकास की गंगा बही है। इतना काम पहले कभी नहीं हुआ। सड़कों का जाल बिछाया गया। पुल बने। तीन राष्ट्रीय मार्ग घोषित कराए गए। एक राज्यमार्ग मंजूर कराया। सामुदायिक भवन, पंच चिकित्सा केंद्र, स्टेडियम, आडिटोरियम, 36 यात्री शेड, मेरी उपलब्धियों में हैं। 

समाज का हर वर्ग दुखी है
पूर्व मंत्री अनीस अहमद उर्फ फूल बाबू का कहना है कि महंगाई बढ़ी है। हर वर्ग दुखी है। तमाम लोगों पर झूठे मुकदमे लिखे गए। अधिकारियों और कर्मचारियों पर डरा धमकाकर दबाव बनाया गया। किसानों को पैदावार का मूल्य नहीं मिला। बसपा की सरकार बनने पर झूठे मुकदमे नहीं लिखे जाएंगे। किसानों को पैदावार का पूरा दाम मिलेगा। 

पूरनपुर और बरखेड़ा का भी बीसलपुर जैसा मिजाज
बीसलपुर विधानसभा से मिली हुई पूरनपुर और बरखेड़ा विधानसभा सीटें हैं। इनपर भी जातिगत समीकरण हावी रहते हैं। पूरनपुर सुरक्षित सीट है। विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा संख्या अनुसूचित जाति की है। मुस्लिम मत करीब 67 हजार हैं। ठाकुर, ब्राह्मण की भी अच्छी खासी संख्या है। रखेड़ा क्षेत्र में लोधी राजपूत और किसान मतदाता एक लाख से अधिक हैं। करीब 50 हजार मुस्लिम हैं। पूरनपुर और बरखेड़ा में सिख के साथ, बंगाली समुदाय के मतदाता निर्णायक होते हैं। इस बार हार-जीत के अंतर को राठौर भी प्रभावित करेंगे।
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