जिलों में कप्तानी से लेकर थानों पर थानेदारी तक के लिए डीजीपी ने मानक तय कर दिए हैं। इसके लिए अंग्रेजी के ‘थ्री सी’ पर खास ध्यान रहेगा। यह थ्री सी कंट्रीब्यूशन, कंसर्न और कंडक्ट है। यानी पुलिस विभाग में तैनाती के लिए योगदान, चिंतन और आचरण का मानक अपनाया जाएगा।
बता दें कि डीजीपी ओम प्रकाश सिंह जिस जोन में भी समीक्षा के लिए जा रहे हैं वहां यह गुरुमंत्र जरूर दे रहे हैं। वह शनिवार को जब मेरठ में समीक्षा कर रहे थे तो वहां भी उन्होंने अपने मातहतों को इस बारे में निर्देश दिए। इससे पहले उन्होंने लखनऊ और कानपुर में भी समीक्षा के दौरान इसी तरह के निर्देश दिए थे।
पुलिस कर्मियों के आचरण को लेकर पूर्व में भी ओपी सिंह अपने मातहतों को हिदायत दे चुके हैं। उनका आचरण आम जनता के साथ मित्रवत हो, अपने कामों के प्रति वे सचेत रहें और प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने और कानून व्यवस्था में वह किस तरह योगदान दे सकते हैं, इसके लिए वह बार- बार मातहतों को निर्देश दे रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिलों में बड़े पैमाने पर आईपीएस अधिकारियों का स्थानांतरण होना है। उससे पहले डीजीपी सभी जोन के अधिकारियों से मिलकर उनकी कार्यशैली जानना चाहते हैं। डीजीपी पिछले छह दिनों में तीन जोनल मुख्यालय की समीक्षा कर चुके हैं। पांच फरवरी की रात वह कानपुर पुलिस लाइन पहुंचे थे। इसके बाद सात फरवरी को लखनऊ पुलिस लाइन में अधिकारियों से रूबरू हुए।
शनिवार को वह मेरठ में थे जहां उन्होंने जोन के सभी जिलों के पुलिस कप्तानों के साथ समीक्षा की थी। माना जा रहा है कि वह अब पूर्वांचल के गोरखपुर और वाराणसी में से किसी एक जोन का दौरा जल्द कर सकते हैं।