पुलिस सेवा का आकर्षण हम खुद ही खो रहे हैं। हम आपसी संवाद से दूर हैं। लखनऊ में भी रह कर लगता है कि किसी आईलैंड में रह रहे हैं। बुधवार को महानगर स्थित रेडियो मुख्यालय के सभागार में डीजीपी ओम प्रकाश सिंह ने पेंशनर्स के गिले शिकवे सुनने के बाद यह बात कही।
डीजीपी ने अफसरों को हिदायत दी कि वे पुलिस पेंशनर्स की समस्याओं को बिना हिचक दूर करें, क्योंकि हम सबको भी एक दिन इसी क्लब में शामिल होना है। कहा कि पुलिस पेंशनर्स परिवार के सदस्य हैं, वे चाहे जिस रैंक के हों उनसे सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो यह हमारी विफलता है। 20-25 साल से पेंशनर्स कल्याण संस्थान का स्वरूप एक जैसा है। इसमें समय के साथ बदलाव होना चाहिए।
प्रदेश में कितने पुलिस पेंशनर्स हैं इसका कोई आंकड़ा नहीं है। इनका डाटाबेस रखने की जरूरत है। इसे तैयार करने का काम शुरू किया गया है। कल्याण संस्थान के सुधार के लिए एक कंसल्टेंट रखने की जरूरत है। कंसल्टेंट इसकी बेहतरी के लिए ब्लू प्रिंट तैयार करे और उस पर काम हो। कहा कि बहुत से ऐसे शासनादेश, ऑर्डर या सर्कुलर आते हैं जो रिटायर्ड पुलिस कर्मियों के लिए कारगर होते हैं लेकिन कोई डाटाबेस न होने से यह जानकारी उन तक नहीं पहुंच पाती।
डीजीपी ने कहा कि पेंशनर्स कल्याण समिति के अध्यक्ष ईश्वर चंद्र द्विवेदी ने जिन बिंदुओं को यहां रखा है, उसके बारे में एडीजी पुलिस मुख्यालय बीपी जोगदंड ने कई आश्वासन दिए हैं। वह सही सलामत जमीन पर उतरें, इसके लिए प्रार्थना करता हूं।
तब एक कोने में बैठ जाता था
डीजीपी ने कहा, पिछले कई साल से पुलिस वीक मनाने की परंपरा रही है। हमारे पास संसाधन कम थे, तब यही हॉल पुलिस वीक का मुख्य केंद्र हुआ करता था। पुरानी यादें ताजा करते हुए उन्होंने कहा, जब वह एएसपी या एसपी के रूप में पुलिस वीक में आते थे तो भयभीत होकर एक कोने में बैठ जाते और सामने बैठे अफसरों की बातें सुनते। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसी हॉल में डीजीपी के रूप में इस मंच से आपको संबोधित करने का मौका मिलेगा।