फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोदी जैसा फरमान, सूबे में कभी नहीं चढ़ा परवान!

Sat, 01 Nov 2014 02:36 AM IST
महेंद्र तिवारी/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अफसरों के शाही खर्च में कमी कर राजकोषीय घाटे को कम करने के उपायों का ऐलान अब किया है। प्रदेश में पांच साल पहले ही ऐसे फरमान जारी किए जा चुके हैं। मगर सरकार शासनादेश जारी कर इस पर अमल करवाना ही भूल गई।
विज्ञापन


प्रदेश में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बाद वर्ष 2009 में वेतन व पेंशन पर सरकार का बजट खर्च काफी बढ़ गया था। तब तत्कालीन मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्त ने उसी साल 26 अक्तूबर को व्यय प्रबंधन व प्रशासकीय खर्च में कमी लाने के लिए एक विस्तृत आदेश जारी किया था।

इस शासनादेश में नॉन प्लानिंग की दस मदों में 10 फीसदी और कई अन्य मदों में पांच फीसदी तक की कटौती करने का प्रावधान था। मसलन यात्रा, स्टेशनरी, छपाई व प्रकाशन, विज्ञापन, साज-सज्जा व आतिथ्य जैसे कार्यों के खर्च में कमी लानी थी। लेकिन इस शासनादेश में जिन-जिन बातों की मनाही थी, अफसरों ने हर उन बातों को नजरंदाज कर शाहखर्ची जारी रखी।
विज्ञापन


सरकार कुछ-कुछ दिनों के अंतराल पर तमाम शासनादेशों का रिमाइंडर जारी करती है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि 2009 के बाद इस आदेश का रिमाइंडर तक जारी नहीं किया गया। जबकि कई विभागों ने 2009 के इस शासनादेश की जानकारी से ही इन्कार कर दिया।

हकीकत- 1: हवाई यात्रा के खर्च बढ़ाने वाली तैनाती

दिल्ली में उत्तर प्रदेश शासन के स्थानिक आयुक्त, अपर स्थानिक आयुक्त सहित विभिन्न स्तर के कई पद सृजित हैं। सरकार बड़े व कई विभागों का काम एक साथ संभालने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को लखनऊ के साथ ही दिल्ली में सृजित पदों पर भी तैनाती देती है।

नतीजतन अधिकारियों को दोनों स्थानों के कार्यालय संभालने के लिए अक्सर यात्रा पर रहना पड़ता है। चूंकि ये अधिकारी हवाई यात्रा के लिए अधिकृत होते हैं, नतीजतन खर्च में भारी बढ़ोतरी हो जाती है। जबकि दिल्ली में सृजित पदों पर अफसरों को अलग से तैनाती देकर इस खर्च को कम किया जा सकता है।

देवाशीष पंडा प्रमुख सचिव गृह व कारागार हैं लेकिन सरकार ने उन्हें अपर स्थानिक आयुक्त दिल्ली के पद पर भी तैनाती दे रखी है। इसी तरह अनूप मिश्र राज्य सड़क परिवहन निगम लखनऊ के चेयरमैन को दिल्ली में निवेश आयुक्त बना रखा है। इतना ही नहीं कई दूसरे अफसरों को भी इसी तरह तैनाती मिली हुई है।

हकीकत- 2: कटौती की जगह खरीदने लगे लक्जरी वाहन

शासनादेश में प्रावधान था कि सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को छोड़कर नए वाहन न खरीदे जाएं और उपलब्ध वाहनों में भी पांच फीसदी की कमी लाई जाए। लेकिन हकीकत ठीक इसके उलट है। शायद ही कोई विभाग हो, जिसने गाड़ियां न खरीदी हो।

अफसर अपने विभाग से मिली गाड़ी का उपयोग तो करते ही हैं, अपने अधीन निगमों व स्वायत्त संस्थाओं की गाड़ियों का भी जमकर उपयोग करते हैं। अब विभाग ने अफसरों व मंत्रियों के पसंद की लक्जरी गाड़ियां खरीदनी शुरू कर दी है। इतना ही नहीं अब तो सात लाख रुपये तक की गाड़ी खरीदने का प्रावधान कर दिया गया है।

हकीकत-3: रुके नहीं, बढ़े शाही भोज
खर्च में कटौती करने के लिए तय किया गया था सरकारी भोज का आयोजन पांच सितारा होटल में न किए जाएं। लेकिन तमाम सरकारी कॉन्फ्रेंस रूम और सभागार होने के बावजूद सरकारी सेमिनार और भोजों का आयोजन राजधानी के पांच सितारा होटल में होता है। इससे खर्च में कमी के बजाय बढ़ोतरी हो रही है।

हकीकत-4 : नए कार्यालय व भवन बढ़ाने पर पूरा जोर
नव सृजित मंडल व जिलों को छोड़कर मंडल व जिला मुख्यालयों पर नए कार्यालय व आवासीय भवन न बनाए जाएं। प्रदेश में तब से बड़ी संख्या में मानक को शिथिल कर तहसीलें सृजित की जा चुकी हैं, जहां नए कार्यालय व आवासीय भवनों की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। सरकार ने इस बीच बड़ी संख्या में नए कार्यालयों व आवासीय भवनों का भी सृजन किया है।
विज्ञापन

वर्ष 2009 में ये आदेश भी हुए थे पारित

- शिक्षा, चिकित्सा एवं पुलिस विभाग को छोड़कर सामान्यत: नए पद स्वीकृत न किए जाएं।
- विभागीय पुनर्गठन के लिए मौजूदा पदों को समाप्त कर नए पदों के सृजन पर गुण-दोष के आधार पर विचार हो।

- विभाग, सार्वजनिक उपक्रम, प्राधिकरण व अन्य राज्याधीन स्वायत्तशासी संस्थाएं नए गेस्ट हाउस न खोलें।
- नव सृजित मंडल व जिलों को छोड़कर मंडल व जिला मुख्यालयों पर नए कार्यालय व आवासीय भवन न बनाए जाएं।

- व्यावसायिक प्रोत्साहन के अलावा सजावटी विज्ञापन व प्रचार पर पूरी तरह से रोक रहेगी।
- नव वर्ष व अन्य अवसरों पर सरकारी खर्च से बधाई संदेश, कैलेंडर व डायरी न बांटी जाए।

- अनिवार्य को छोड़कर अन्य प्रशिक्षण कोर्स व सेमिनारों में अधिकारियों व कर्मचारियों को न भेजें।
- सरकारी यात्राओं को आवश्यक व अपरिहार्य कार्यों तक सीमित रखा जाए।
- सरकारी यात्रा में अफसर अपने व्यक्तिगत स्टाफ न ले जाएं।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें