कांग्रेस की शुरुआती सूची पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा किअखिलेश यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव लड़ने के लिए प्रत्याशी के जीतने की क्षमता ही एकमात्र पैमाना है। कोई भी कुछ भी मांग सकता है। मांगने से रोका नहीं जा सकता।
यह संशय बेवजह नहीं है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में 1989 के बाद से कांग्रेस का ग्राफ लगातार गिर रहा है, जब उसने इस सबसे अधिक आबादी वाले राज्य में आखिरी बार सत्ता संभाली थी। कांग्रेस ने 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अकेले लड़ा था और वह सिर्फ दो सीटें जीत पाई थी, जो 2017 के उसके सात सीटों के प्रदर्शन से भी बदतर था।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव
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राजेंद्र पाल गौतम ने समझौते को लेकर उम्मीद जताई और जोर देकर कहा कि दोनों दल अगले साल का उत्तर प्रदेश चुनाव मिलकर लड़ेंगे। इस बीच माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस में हुए हालिया नेतृत्व परिवर्तन — जब तत्कालीन अध्यक्ष अजय राय की जगह कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' को कमान सौंपी गई — को भी सीट-बंटवारे को सुगम बनाने के एक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
कई लोगों का मानना है कि राय समाजवादी पार्टी के साथ पहले से गठबंधन के पक्ष में नहीं थे और उन्हें लगता था कि चुनाव के बाद का गठबंधन पार्टी के लिए ज्यादा मुफीद रहेगा। हालांकि, कुछ कांग्रेस नेताओं का यह भी मानना है कि चुनाव से कुछ महीने पहले पार्टी द्वारा आराधना मिश्रा को चुनने के पीछे एसपी नेतृत्व के साथ उनके बेहतर संबंध भी एक बड़ा कारण हो सकते हैं।