नए साल पर बिजली उपभोक्ताओं को मुआवजा कानून का तोहफा मिल सकता है। यानी तय समय में बिजली संबंधी समस्याएं दूर न हुईं तो उन्हें मुआवजा मिलेगा। ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बृहस्पतिवार को अपर मुख्य सचिव ऊर्जा आलोक सिन्हा को पत्र भेजकर उपभोक्ताओं को मुआवजा देने से संबंधित कानून का लाभ जल्द दिलाने के निर्देश दिए हैं।
विद्युत वितरण संहिता-2005 में ब्रेक डाउन, केबल फॉल्ट, ट्रांसफार्मर बदलने, नया कनेक्शन लेने, मीटर रीडिंग, लोड घटाने-बढ़ाने समेत सभी तरह की शिकायतों व सेवाओं के निस्तारण के लिए समयसीमा निर्धारित की गई है। इस समयसीमा का उल्लंघन होने पर मुआवजे का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद बिजली कंपनियां समय पर शिकायतों का निस्तारण नहीं करती हैं।
इससे उपभोक्ताओं को परेशानी के साथ ही आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इसे लेकर राज्य विद्युत नियामक आयोग के समक्ष कई जनहित याचिकाएं भी दाखिल की गई थीं। इसके आधार पर आयोग ने नया स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019 तैयार किया है। पिछले साल शासन ने इसकी अधिसूचना जारी की थी, लेकिन बिजली कंपनियों ने इसे अभी तक लागू नहीं किया है।
रेगुलेशन के तहत बिजली कंपनियों को अपनी वेबसाइट पर 6 माह के अंदर रिपोर्ट जेनरेशन फ्रेमवर्क विकसित करके सभी श्रेणी 1 के शहरों में 9 माह के अंदर शिकायत केंद्र चालू करना था। शेष शहरों में शिकायत केंद्र के लिए 12 माह व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 18 माह का समय तय किया गया था। इस केंद्र में फोन, ई-मेल, एसएमएस व मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये दावा व शिकायत प्राप्त करने व्यवस्था की जानी थी। मगर बिजली कंपनियों ने कोई व्यवस्थाएं नहीं कीं।
राष्ट्रीय उपभोक्ता दिवस की पूर्व संध्या पर राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने ऊर्जा मंत्री से मिलकर मुआवजा से संबंधित रेगुलेशन लागू कराने का अनुरोध किया। इसके बाद ऊर्जा मंत्री ने अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द इस कानून का लाभ दिलाने के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि जनवरी में रेगुलेशन लागू किया जा सकता है।
अधिकतम 60 दिन में मुआवजा देना अनिवार्य
स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन-2019 के तहत बिजली कंपनियों को उपभोक्ताओं को अधिकतम 60 दिन में मुआवजा देना अनिवार्य होगा। उपभोक्ता को एक वित्तीय वर्ष में उसके फिक्स चार्ज/डिमांड चार्ज के 30 प्रतिशत से अधिक का मुआवजा नहीं दिया जाएगा। मसलन, अगर एक किलोवाट भार क्षमता का कनेक्शन वाला उपभोक्ता अगर महीने में 100 रुपये प्रति किलोवाट फिक्स चार्ज देता है तो उसका पूरे साल का फिक्स चार्ज 1200 रुपये हुआ। ऐसे में उस उपभोक्ता को एक वर्ष में अधिकतम 360 रुपये ही मुआवजा मिल पाएगा।
इस प्रकार होगी मुआवजे की दर
उपभोक्ता समस्या देरी पर मुआवजे की दर (प्रतिदिन)
अंडरग्राउंड केबल ब्रेकडाउन 100 रुपये
सब स्टेशन का निर्माण बाधित होने की स्थिति में वोल्टेज में उतार-चढ़ाव 250 रुपये
नया कनेक्शन वितरण मेंस उपलब्धता पर 50 रुपये
मीटर रीडिंग के मामले 200 रुपये
डिफेक्टिव मीटर व सामान्य फ्यूज ऑफ 50 रुपये
बिलिंग शिकायत और भार में कमी व अधिकता 50 रुपये
श्रेणी परिवर्तन 50 रुपये
ट्रांसफार्मर फेल (ग्रामीण) 150 रुपये
अस्थायी कनेक्शन जारी करना 100 रुपये
बिजली आपूर्ति बढ़ाने के लिए सबस्टेशन की स्थापना 500 रुपये
कॉल सेंटर से रिस्पांस न दिया जाना 50 रुपये
फर्जी अवशेषों को आगे ले जाना 100 रुपये प्रति चक्र
नया कनेक्शन व नेटवर्क विस्तार पर अतिरिक्त भार 250 रुपये
ओवरहेड लाइन व केबल ब्रेकडाउन 100 रुपये
उपभोक्ता विनियम के अनुसार मासिक आधार पर घोषित आपूर्ति 20 रुपये प्रति किलोवाट (शहरी)
10 रुपये प्रति किलोवाट (ग्रामीण)