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यूपी सहकारी ग्राम विकास बैंक के घोटालेबाज तत्कालीन एमडी को 5 साल कैद

Sat, 30 Mar 2019 07:27 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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फाइल फोटो
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उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक का एमडी रहने के दौरान नियमों को दरकिनार कर नियुक्तियां करने और करोड़ों रुपये के घोटाले के मामले में भ्रष्टाचार निवारण की विशेष अदालत ने बैंक के तत्कालीन एमडी नवल किशोर को पांच साल कैद की सजा सुनाई है। 
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भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार शुक्ला ने  उसपर 31 हजार रुपये जुर्माना भी ठोका है। नवल किशोर से साठगांठ कर नियमों को धता बताते हुए बैंक की शाखाओं में बोर्ड लगाने वाले विनोद गुप्ता को भी अदालत ने चार साल के कारावास की सजा सुनाई है। गुप्ता पर भी सात हजार रुपये जुर्माना लगाया गया है।

अदालत ने इस मामले में आरोपी रहीं विनोद गुप्ता की पत्नी सीता गुप्ता को साक्ष्य के अभाव में 27 मार्च को बरी कर दिया था। वहीं नवल  व विनोद को दोषी ठहराने के बाद जेल भेज दिया था। 
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शुक्रवार को दोनों को जेल से लाकर कोर्ट में पेश किया गया। जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज त्रिपाठी व उनके सहयोगी सरकारी वकील नवीन त्रिपाठी व प्रतिभा राय ने दोनों को अधिकतम सजा देने की मांग की। दलील दी कि लोक सेवक रहते हुए नवल किशोर ने गंभीर अपराध किए हैं।

बचाव पक्ष ने कहा-नवल किशोर बुजुर्ग हैं, बाईपास सर्जरी हुई है, कम से कम सजा दें
बचाव पक्ष की ओर से कम से कम सजा देने की मांग करते हुए कहा गया कि  दोनों का पहला अपराध है। यह भी कहा गया कि नवल किशोर वृद्ध है और उसकी बाईपास सर्जरी हुई है।

कोर्ट ने कहा- लोकसेवक रहते किया गंभीर अपराध
भ्रष्टाचार निवारण के विशेष न्यायाधीश अनिल कुमार शुक्ला ने दोनों को सजा सुनाते हुए कहा कि नवल किशोर ने लोकसेवक के रूप में रहते हुए अपराध किया है। कोर्ट ने कहा, भर्ती पर रोक के बाद भी भर्ती करना, विदेश यात्रा के दौरान गलत तरीके से टैक्सी व टेलीफोन बिल का भुगतान लिया गया। 

यही नहीं नवल किशोर ने अपने आवास पर बैंक के सुरक्षागार्ड तैनात किए। मनमाने तरीके से साज-सज्जा पैक्सफेड से कराने और कम्प्यूटर लैब स्थापित करने में मनमाने तौर पर खर्च किया। साथ ही विनोद गुप्ता से साठगांठ करके शाखाओं में बोर्ड लगवाए और शाखा प्रबंधक को विवश करके धन वसूला, जो कि गंभीर अपराध है।

विवेचक  के खिलाफ प्रकीर्णवाद दर्ज
वादी ने अपना व गवाहों के बयान कोर्ट के जरिए विवेचक को भेजा था और गुजारिश की थी कि विवेचना की रिपोर्ट कोर्ट तलब कर ले। कोर्ट के रिपोर्ट मांगने पर पुलिस ने एक रिपोर्ट भेजकर बताया कि विवेचक प्रशांत कुमार प्रशिक्षण पर गए हैं वहीं दूसरे विवेचक ने बताया कि पहले के विवेचक ने उन्हें कागजात नहीं दिए हैं जब उन्हें कागजात भिजवाएंगे तो विवेचना पूरी करके कोर्ट को परिणाम से अवगत कराएंगे। इस पर कोर्ट ने विवेचक के खिलाफ कोर्ट में प्रकीर्णवाद दर्ज करके कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया। 

किसको किन-किन मामलों में सजा
नवल किशोर : कोर्ट ने अपने 190 पृष्ठ के विस्तृत आदेश मे जहां नवल किशोर को धोखाधड़ी, उगाही, गबन, जाली दस्तावेज तैयार करने और भ्रष्टाचार समेत 9 मामलों में।
विनोद गुप्ता : धोखाधड़ी, उगाही और साजिश रचने के लिए।

99 भर्तियां कीं, 385 को गलत तरीके से दिया प्रमोशन

उ. प्र. सहकारी ग्राम विकास बैंक लिमिटेड के तत्कालीन महाप्रबंधक प्रशासन आलोक दीक्षित नें जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर 11 जनवरी 2013 को हुसैनगंज थाने  में नवल किशोर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि 2 फरवरी 2010 से 30 मार्च 2012 के बीच  नवल किशोर ने तत्कालीन बैंक प्रशासक से हाईकोर्ट के आदेश को छिपाया और गलत तरीके से प्रस्ताव पारित कराए। 

जबकी हाईकोर्ट ने किसी भी नीतिगत फैसले लेने पर रोक लगाई थी।  हाईकोर्ट के निर्देश के विपरीत 99 कर्मियों की सीधी भर्ती कर ली, यही नहीं 385 नियम विरुद्ध प्रोन्नतियां कीं। कर्मी को दो वर्ष की प्रतिनियुक्ति पर लेने के एक महीने बाद ही बैंक सेवा में सम्मिलित करके बोझ बढ़ाया।
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मनमाने फैसलों से पहुंचाया नुकसान

 नवल किशोर ने विदेश यात्रा पर बैंक के 1 लाख 10 हजार 34 रुपये खर्च किए। वहीं जनपदीय कार्यालयों में इंटरनेट कम्प्यूटर पर बिना जरूरत के 45 लाख 54 हजार रुपये खर्च किए । महज 10 लाख रुपये की वित्तीय सहायता के बावजूद कम्प्यूटर लैब के लिए 42 लाख खर्च किए। वीआईपी गेस्ट हाउस की साज सज्जा और बैंक के परदे बदलने में 19 लाख 48 हजार रुपये मनमाने तरीके से खर्च किए।  गार्डों को दिए गए वेतन में बैंक को 3 लाख 85 हजार 452 रुपये का नुकसान पहुंचाया।

विवेचना के दौरान सामने आया था बोर्ड घोटाला
 मामला दर्ज होने के बाद हुसैनगंज पुलिस विवेचना कर रही थी बीच में ही शासन ने विवेचना को विशेष अनुसंधान ब्यूरो (सहकारिता) को सौंप दिया। विवेचना के दौरान पता चला कि नवल किशोर ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके बैंक की शाखाओं में 400 बोर्ड लगाने का फैसला किया और विनोद गुप्ता के जरिये बोर्ड लगवाए जिसका पैसा विनोद की पत्नी सीता के खाते में जमा हुआ। ब्यूरो ने इस मामले में विवेचना के बाद तीनों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दायर कर दी। कोर्ट में चार्जशीट दायर होने के बाद कोर्ट ने 19 मार्च 2015 को नवल किशोर, विनोद गुप्ता और सीता गुप्ता के खिलाफ आरोप तय करके सुनवाई की।
 
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