मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि यूपी सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2022 तक सभी को घर देने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में 48 लाख लोगों के पास व शहरी क्षेत्रों में एक बड़ी आबादी के पास मकान नहीं है। इसलिए हमने 10 लाख मकान बनाने का लक्ष्य रखा है।
‘कन्फेडरेशन ऑफ रीयल इस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशंस ऑफ इंडिया (क्रेडाई) द्वारा आयोजित ‘यूपी अहेड कॉन्क्लेव’ में रियल स्टेट कारोबारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने यह बातें कहीं।
सीएम योगी ने बताया, इस योजना के तहत गांवों में 10 लाख आवास बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से 06 लाख परिवारों को चिन्हित कर धनराशि का आवंटन भी कर दिया गया है।
नौकरशाही की नकारेपन से फेल हो रही योजनाएं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने योजनाओं के फेल होने के लिए नौकरशाही पर निशाना साधा है। बिल्डरों की मनमानी रोकने के लिए ‘रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट’ के लागू होने के बाद भी राज्य स्तर पर अब तक ‘रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी’ (रेरा) का गठन नहीं होने पर सीएम योगी ने नौकरशाही को आड़े हाथों लिया। कहा, रेरा का गठन न होना नौकरशाहों की अकर्मण्यता का नतीजा है। उन्हीं की वजह से योजनाएं फेल होती हैं।
उन्होंने कहा कि बिल्डरों और खरीदारों के बीच विवाद एक बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए ही केंद्र सरकार ने ‘रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट’ तैयार किया था। इसे यूपी में भी लागू किया गया है।
इसके तहत अब रियल स्टेट की परियोजनाओं का पंजीकरण शुरू होने जा रहा है, जिससे बिल्डरों की समस्याएं स्वत: खत्म हो जाएंगी। कारोबार में पारदर्शिता आएगी और जनता को भी समय से मकान उपलब्ध हो सकेंगे। रेरा का पोर्टल 26 जुलाई को लॉन्च किया जाएगा।
जनता के प्रति जवाबदेह बनें बिल्डर
सीएम योगी ने बिल्डरों को नसीहत देते हुए कहा कि बिल्डरों को जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा। प्रदेश में व्यवसाय की अपार संभावनाएं हैं। लेकिन, सफलता के लिए जरूरी है कि वे जनता का विश्वास जीतें।
सख्त कदम उठाने पर मजबूर न करें बिल्डर
सीएम ने कहा कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा में करीब डेढ़ लाख लोगों ने बिल्डरों के पास पैसा जमा कर दिया है। इसके बावजूद उन्हें अब तक फ्लैट नहीं मिल पाया है।
हालांकि सरकार के दबाव में कुछ बिल्डरों ने मकान देने के लिए समय सीमा तय कर दी है। जबकि कुछ बिल्डर्स कोई कदम नहीं उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर संवाद से हल नहीं निकलेगा तो सरकार सख्त कदम उठाने से नहीं हिचकेगी। बिल्डर्स ऐसा काम न करें कि सरकार को सख्त कदम उठाना पड़े।