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चुनाव में कुछ भी कहा हो लेकिन प्रतिशोध के साथ किसी को काम करने नहीं देंगे

Wed, 03 May 2017 06:25 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रबोधन में योगी आद‌ित्यनाथ
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उत्तर प्रदेश विधान सभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम आज विधान भवन के तिलक हाल में शुरू हो गया। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, राज्यपाल राम नाईक, सीएम योगी आदित्यनाथ, नेता विरोधी दल राम गोविन्द  चौधरी समेत कई मंत्री और विधायक प्रबोधन कार्यक्रम में मौजूद हैं।
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पहली बार निर्वाचित विधान सभा सदस्यों की संख्या 238  है। दूसरी बार निर्वाचित - 73 तीसरी बार निर्वाचित - 33चौथी बार निर्वाचित 28 चार बार से अधिक बार निर्वाचित सदस्यों की संख्या 31 है।

कार्यक्रम में सीएम योगी ने कहा, यूपी ‌व‌िधानसभा के ल‌िए पहली बार चुनकर आए 238 व‌िधायकों और पुराने व‌िधायकों का स्वागत और अभ‌िनंदन करता हूं। हृदय नारायण दीक्ष‌ित को भी बधाई देता हूं क‌ि उनकी क्लास शत-प्रत‌िशत सफल है। अकसर चुने गए जन-प्रत‌िन‌िध‌ियों के बारे में धारणा होती है क‌ि वे ज्यादा देर तक एक मंच पर रुक नहीं सकते। उन्हें एक साथ रखना वैसा ही होता है जैसे तराजू में मेंढक को तोलना। 
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  मुझे खुशी है क‌ि राज्यपाल राम नाईक जी कार्यक्रम के समय से 5 म‌िनट पहले आ गए थे और उनके आने से पहले पूरा हॉल भर चुका था। राज्यपाल ने अनेक श्रेष्ठ परंपराओं को आगे बढ़ाया है। अपनी एक-एक गतिविधि को राज्यपाल महोदय डायरी में नोट करके रखते हैं। वे किससे मिले इन सब बातों को डायरी में लिखते हैं।

अक्सर देखा गया है क‌ि राज्यपाल ऐसे कार्यक्रमों में जाने से बचते हैं, हम लोगों के ल‌िए हर्ष का विषय है क‌ि जब हमने राज्यपाल के सामने ये प्रस्ताव रखा क‌ि नए चुने गए 238 प्रतिनिधियों को आपके मार्गदर्शन की जरूरत है तो वह तैयार हो गए।

योगी ने कहा, यूपी विधानसभा लोकतंत्र की बड़ी व्यवस्था। 22 करोड़ लोगों की विधानसभा है जिसमें क‌ि एक यूरोप समा जाए। यूपी में बहुत संभावनाएं है। यहां प्रकृत‌ि और परमात्मा की असीम कृपा है। हमने इस कृपा का उस रूप में उपयोग नहीं कर पाया जैसे करना चाह‌िए था। लोकतंत्र में ‌व‌िधाय‌िका की भूम‌िका को कोई नकार नहीं पाया है। लेक‌िन इसकी व‌िश्वसनीयता पर सवाल उठता है।

अगर लोगों ने हमें चुना है और हम उसके अनुरूप काम नहीं करेंगे तो पांच साल बाद हमें जनता के सामने जाना है। अगर हम खरे नहीं उतरेंगे तो जनता हमें वापस भेज देगी। 

इस देश में न्यायपालिका से रिटायर होने वाला भी चाहता है क‌ि मैं सांसद बन जाऊं, नौकरशाह भी ऐसा चाहता है लेकिन उंगली भी सांसद पर उठती है। जहां कुछ अच्छा करने की गुंजाइश है वहीं उंगली उठती है।

हमें ध्यान रखना चाह‌िए क‌ि जब हम सदन में बात रखें तो मर्यादा में हों। अगर हम ऐसा कर सकें तो आने वाली पीढ़ी के सामने उदाहरण रख पाएंगे। अगर हम सदन में नियम के तहत अपनी बात रखते हैं तो वो ज्यादा प्रभावी होती है।

योगी ने उदाहरण देकर बताया क‌ि संसद में उन्होंने जब संय‌मित होकर बात रखी तो उस पर अमल किया गया। उन्होंने बताया क‌ि हम विपक्ष में थे और हमें गोरखपुर में एक बड़ी योजना मिल गई।
  संसदीय मंच पर की गई बहस आपके व्यक्तित्व में निखार ला सकती है। हमारे ऊपर विश्वसनीयता का संकट है वह सदन में न रहने का कारण है। 

गंदगी एक व्यक्त‌ि फैलाता है लेक‌िन बदनाम सब होते हैं। विश्वसनीयता कैसे बनानी है उस पर काम करना होगा। प्रबोधन कार्यक्रम का यही उद्देश्य है। 

शुरुआत में जब हम संसद में गए तो परेशानी होती है। हम सीखते थे। दो-तीन दिन में हम सबकुछ सीख गए। संसद सत्र में अपने प्रश्न मैं खुद तैयार कर लेता था। कुछ घंटों में मैं डेढ़ सौ-दो सौ प्रश्न तैयार कर लेता था।

हमने चुनाव में कुछ भी कहा हो लेकिन हम किसी के साथ अन्याय नहीं होने देंगे न ही प्रतिशोध के साथ काम करने देंगे। कानून किसी को हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा।

विकास की योजनाओं में कोई भेदभाव नहीं होना चाह‌िए। जन प्रतिनिधि को शोभा नहीं देता क‌ि कोई आपसे कहे तब मुद्दा उठाए। आप खुद सरकार हैं। आपको खुद आगे आना होगा। तब हम अच्छा काम कर सकेंगे। यूपी में बहुत संभावनाएं हैं।
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मुझे खुशी है क‌ि आज उद्घाटन सत्र में कई लोगों का मार्गदर्शन आपको प्राप्त होगा।
 
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