पछवारा साउथ कोल ब्लॉक विकास को मंजूरी
कैबिनेट बैठक में नेयवेली उत्तर प्रदेश पावर लिमिटेड (एनयूपीपीएल) को आवंटित पछवारा साउथ कोल ब्लॉक के विकास हेतु ₹2242.90 करोड़ की आकलित लागत को मंजूरी प्रदान की गई। यह कंपनी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड एवं एनएलसी इंडिया लिमिटेड का संयुक्त उपक्रम है। परियोजना का वित्तपोषण 70% ऋण (₹1570.03 करोड़) एवं 30% अंशपूंजी के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें उत्पादन निगम की 49% हिस्सेदारी के अनुसार ₹329.71 करोड़ अंशपूंजी देय होगी।
इस कोल ब्लॉक से प्राप्त कोयला मुख्य रूप से कानपुर नगर स्थित 3×660 मेगावाट घाटमपुर तापीय विद्युत परियोजना की इकाइयों में उपयोग किया जाएगा। ब्लॉक में खनन कार्य 19 दिसंबर 2025 से प्रारंभ हो चुका है और अगस्त 2026 से कोयला निकासी का लक्ष्य रखा गया है।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि इस कोल ब्लॉक के विकसित होने से घाटमपुर प्लांट में बिजली उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आएगी। प्रारंभिक आकलन के अनुसार लगभग 80 पैसे प्रति यूनिट तक बिजली सस्ती होगी, जबकि कुल मिलाकर करीब ₹1 प्रति यूनिट तक कमी आने की संभावना है। इससे प्रदेश को सस्ती, सुलभ और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी।
बजट होटल विकसित करने की भी योजना
इंटरनेशनल एक्जीबिशन-सह-कन्वेंशन सेंटर का निर्माण प्रदेश की राजधानी, लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय स्तर के डिफेंस एक्सपों जैसे आयोजनों के स्थल के रूप में की जा रही है। कन्वेंशन सेंटर के आसपास 5-स्टार और बजट होटल विकसित करने की भी योजना है, जिससे देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों को बेहतर आवास सुविधाएं मिल सकें। साथ ही, यहां आयोजित होने वाले आयोजनों के दौरान भारी उपकरणों, मॉडलों के प्रदर्शन की भी व्यवस्था होगी। यह परियोजना लखनऊ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख आयोजन स्थल के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इसी क्रम में योगी सरकार की ने लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रोशन-उद-दौला भवन और छतर मंजिल को ‘एडाप्टिव रि-यूज’ के तहत सार्वजनिक-निजी सहभागिता (पीपीपी) मॉडल पर विकसित करने को कैबिनेट ने मंजूर प्रदान की है। इसके लिए इन भवनों से संबंधित भूमि का स्वामित्व पर्यटन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित करने का प्रस्ताव किया गया है।
इन ऐतिहासिक इमारतों को हेरिटेज पर्यटन इकाइयों के रूप में विकसित कर राज्य में पर्यटन को नई दिशा देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह भूमि हस्तांतरण अपवादस्वरूप किया जा रहा है और इसे भविष्य के लिए उदाहरण नहीं माना जाएगा।
साथ ही लखनऊ की यातायात समस्या के समाधान के लिए भी एक महत्वपूर्ण परियोजना को मंजूरी दी गई है। इस क्रम में लखनऊ-हरदोई मार्ग पर स्थित दुबग्गा चौराहे पर 1,811.72 मीटर लंबा तीन लेन का फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस परियोजना की कुल लागत 305.31 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है, जिसे कैबिनेट द्वारा अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।
दुबग्गा चौराहा लखनऊ शहर का एक प्रमुख यातायात केंद्र है, फ्लाईओवर के निर्माण से इस क्षेत्र में ट्रैफिक जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि ये सभी परियोजनाएं लखनऊ को आधुनिक, सुव्यवस्थित और पर्यटन के दृष्टिकोण से आकर्षक शहर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना
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घरों और उद्योगों में उपयोग किए गए पानी का शोधन कर हो सकेगा दोबारा उपयोग
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए शोधित जल (ट्रीटेड वॉटर) के सुरक्षित पुनः उपयोग के लिए नई नीति लागू करने की तैयारी कर ली है। इस नीति का उद्देश्य घरों और उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को शोधित कर दोबारा उपयोग में लाना है, जिससे पेयजल संसाधनों पर दबाव कम हो सके।
प्रदेश में सिंचाई, घरेलू, औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्रों में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (एफएसटीपी) के जरिए शोधित जल के सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देने की योजना बनाई है।
नीति के तहत शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में निकलने वाले अपशिष्ट जल को ट्रीट कर पहले चरण में नगर निकाय उपयोग, निर्माण कार्य, बागवानी और सिंचाई में इस्तेमाल किया जाएगा। दूसरे चरण में उद्योग, कृषि और रेलवे जैसे क्षेत्रों में इसका विस्तार होगा। वहीं तीसरे चरण में ड्यूल पाइप सिस्टम के जरिए घरों तक गैर-पीने योग्य उपयोग के लिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
योगी सरकार का लक्ष्य है कि तकनीक और नवाचार के माध्यम से जल प्रबंधन को मजबूत बनाया जाए। इस पहल से जहां एक ओर स्वच्छ पेयजल की बचत होगी, वहीं दूसरी ओर जल निकायों में प्रदूषण भी कम होगा। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और ऊर्जा खपत में भी कमी आएगी।
राजस्व संहिता में बड़ा बदलाव, नक्शा पास होते ही माना जाएगा लैंड यूज परिवर्तन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में उ0प्र0 राजस्व संहिता, 2006 की धारा-80 में संशोधन हेतु अध्यादेश 2026 को मंजूरी दे दी गई। इस अहम फैसले के तहत विकास प्राधिकरणों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, विनियमित क्षेत्रों तथा उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद के अधीन क्षेत्रों में गैर-कृषि उपयोग (लैंड यूज़) परिवर्तन की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है।
अब इन क्षेत्रों में अलग से लैंड यूज बदलवाने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि किसी भूखंड का नक्शा प्राधिकरण द्वारा पास हो जाता है, तो उसी को भूमि उपयोग परिवर्तन माना जाएगा। इससे पहले लोगों को दोहरी प्रक्रिया (पहले लैंड यूज परिवर्तन और फिर नक्शा पास कराने) से गुजरना पड़ता था, जिससे समय और संसाधनों की अधिक खपत होती थी।
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि नई व्यवस्था में नक्शा पास कराने की प्रक्रिया में ही सभी औपचारिकताएं समाहित कर दी गई हैं। इससे न केवल आमजन को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि निवेशकों के लिए भी प्रक्रिया आसान और पारदर्शी बनेगी। इस सुधार से प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्योग स्थापना में तेजी आएगी और उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी।