इंडक्शन कुकर का भी किया जा रहा इस्तेमाल।
- फोटो : amar ujala
होटल के जनरल मैनेजर वीरेंद्र गुप्ता ने बताया कि अप्रैल माह तक श्रावस्ती में बौद्ध तीर्थ करने वाले स्थानीय और विदेशी श्रद्धालुओं की आवक बनी रहती है।
इस दौरान प्रतिदिन लगभग 200 पर्यटक व 50 होटल स्टाफ सहित 250 लोगों का खाना व नाश्ता बनता है जिसके लिए प्रतिदिन दो कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की जरूरत पड़ती है। सिलिंडर के अभाव में 15 दिनों से होटल में पर्यटकों व स्टॉफ के लिए मजबूरन लकड़ी का चूल्हा जलाना पड़ रहा है। जिसमें अब तक 15 क्विंटल लकड़ी का इस्तेमाल हो चुका है।
होटल में लकड़ी पर बनता खाना।
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होटल के डॉरेक्टर प्रदीप कुमार सक्सोना ने बताया कि लकड़ी का चूल्हा जलने से एक ओर जहां प्रदूषण हो रहा है तो वहीं दूसरी ओर खाना पकाने व नाश्ता तैयार करने में समय भी लग रहा है। इंडेक्शन की मदद भी ली जा रही है लेकिन बड़े स्तर पर इंडेक्शन पर खाना पकाना संभव नहीं हो पा रहा है। सिलिंडर की आपूर्ति के लिए जिला प्रशासन को पत्राचार किया गया है लेकिन अभी राहत नहीं मिली है।