सामाजिक समरसता और समावेशी विकास को ध्यान में रखते हुए कैबिनेट ने राज्य के विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए 'उत्तर प्रदेश घुमंतू विकास बोर्ड' के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके साथ ही, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के अंतर्गत संचालित 'विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना 2.0' के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु इसके मार्गदर्शी सिद्धांतों में संशोधन एवं नए परिव्यय को स्वीकृति दी गई है। ग्राम्य विकास विभाग की 'समुदाय परियोजना' को सुचारू रूप से चलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार और मेसर्स एच.सी.एल. फाउंडेशन के बीच वर्ष 2015 से चले आ रहे समझौते को आगामी 5 वर्षों के लिए पुनः विस्तारित करने का फैसला लिया गया है।
किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और मौसम की बेरुखी से होने वाले नुकसान से सुरक्षा प्रदान करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 (खरीफ 2026 एवं रबी 2026-27) में संपूर्ण प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना को लागू किए जाने के प्रस्ताव को हरी झंडी दिखाई गई है।
प्रशासनिक और कानूनी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण विधायी फैसले लिए गए। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के अनुपालन में 'उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम, 2004' में प्रथम संशोधन करने की मंजूरी दी गई। श्रम एवं सेवायोजन विभाग के अंतर्गत 'उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली, 2026' के प्रख्यापन को स्वीकृति मिली, जबकि 'भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक, 2020' को केंद्र सरकार से वापस लिए जाने पर सहमति बनी। इसके अतिरिक्त, राज्य संपत्ति विभाग लेखा संवर्ग (अराजपत्रित) सेवा नियमावली और भूतत्त्व एवं खनिकर्म (समूह ‘क’ एवं ‘ख’) सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026 को प्रख्यापित किया गया है। आबकारी विभाग के तहत 'उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण (संशोधन) विधेयक, 2026' को विधान मंडल में पेश करने तथा यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण नीति-2017 के तहत मेसर्स आइक्यो सॉल्यूशंस प्रा. लि. को व्यावसायिक परिचालन तिथि में ढील देने की स्वीकृति दी गई।
वित्तीय व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कैबिनेट ने वित्तीय वर्ष 2026-2027 के अनुपूरक अनुदान तथा तत्संबंधी विनियोग विधेयक को अपनी मंजूरी प्रदान की। इसके साथ ही, भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक द्वारा तैयार की गई वर्ष 2026 की विभिन्न लेखापरीक्षा रिपोर्टों—जिसमें राज्य वित्त, मनरेगा, जल जीवन मिशन, सिविल और राजस्व ऑडिट रिपोर्ट शामिल हैं—को राज्य विधान मंडल के समक्ष प्रस्तुत करने से पूर्व माननीय राज्यपाल महोदया की अनुमति प्राप्त करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।