राज्यसभा चुनाव के दौरान बदले समीकरणों की छाया विधानसभा की सात सीटों के उपचुनाव पर भी पड़ती दिखाई दी। ज्यादातर सीटों पर मुस्लिमों का बड़ा हिस्सा सपा के साथ जाने से सात सीटों में बुलंदशहर छोड़कर शेष में ज्यादातर पर सपा की साइकिल का भाजपा के कमल से कड़ा मुकाबला हो गया।
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हालांकि कहीं कांग्रेस, कहीं बसपा और कहीं निर्दल ने मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश की लेकिन विपक्ष से सपा ही बढ़त लेती दिखी। अलबत्ता घाटमपुर और बांगरमऊ में पंजा जिस तरह अपनी पकड़ बनाता दिखा उससे यह कांग्रेस यह संदेश देने में कामयाब होती नजर आई कि उसे उत्तर प्रदेश से एकदम खत्म मान लेना ठीक नहीं है।
लोगों की निगाह में वह भी एक विकल्प है। बशर्ते कांग्रेस उम्मीदवारों का चयन ठीक करे। मतदान के दौरान जिस तरह सभी जगह साइकिल, हाथी, पंजा भाजपा से मुकाबला करते दिखे उससे यह फिर साबित हो गया है कि प्रदेश में वह अब भी नंबर एक है।
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पर कुछ स्थानों पर मतदाताओं के बहिष्कार तो कुछ पर भितरघात की घटनाएं भाजपा के लिए सोचने का मुद्दा भी लेकर आई है। जिस पर भाजपा के रणनीतिकारों को जरूर सोचना पड़ेगा।
नौगावां सादात: प्रदेश सरकार में कैबिनट मंत्री रहे चेतन चौहान के निधन के कारण यहां हो रहे उपचुनाव में मतदान के दिन भाजपा की उम्मीदवार व स्व. चौहान की पत्नी संगीता चौहान व सपा के जावेद आब्दी के बीच मुकाबला सिमटता दिखा। जिसे कुछ स्थानों पर कांग्रेस ने तो कुछ जगह बसपा के फुरकान अहमद ने तिकोना बनाने की कोशिश की।
पर मतदान केंद्रों पर दिखे माहौल से लगा यही कि मुस्लिम मतदाताओं के बीच जावेद के मुकाबले फुरकान हल्के पड़े और यह देखकर बाद में मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा सपा के जावेद के साथ मुड़ गया। ऊपर से यहां कुछ स्थानों पर मतदान बहिष्कार और गन्ना क्त्रस्य केंद्र न खुलने को लेकर लोगों की नाराजगी ने भी भाजपा की चुनौतियां बढ़ाई। कांग्रेस से यहां जाट बिरादरी से कमलेश सिंह को प्रत्याशी बनाया है।
बुलंदशहर: पूर्व मंत्री व भाजपा नेता वीरेंद्र सिंह सिरोही के निधन से रिक्त बुलंदशहर में अन्य सीटों के विपरीत भाजपा से बसपा का मुख्य मुकाबला होते दिखा। सपा समर्थित रालोद उम्मीदवार प्रवीण सिंह के लिए बसपा के मुस्लिम प्रत्याशी हाजी युनूस बड़ी मुसीबत बन गए। इस सीट पर पश्चिम में अनुसूचित जाति के लोगों के बीच तेजी से जगह बना रहे भीम आर्मी की पार्टी आजाद समाज पार्टी (एएसपी) के मुस्लिम उम्मीदवार हाजी यामीन और ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार रियाजुद्दीन की मुस्लिमों में सेंधमारी भी सपा की उम्मीदों के लिए बाधाएं खड़ी करते दिखी।
मतदाताओं का रुझान देखकर साफ लग गया कि एएसपी उम्मीदवार न होता तो इस सीट पर बसपा के उम्मीदवार हाजी यूनुस की जीत की उम्मीदें आसानी से परवान चढ़ सकती थीं। पर, एएसपी के यामीन ने और भाजपा के पक्ष में सहानुभूति की हवा ने यहां कमल की कठिनाइयां कम कर दी। कांग्रेस ने इस सीट पर सुशील चौधरी को उम्मीदवार बनाया है ।
टूंडला: पूर्व मंत्री भाजपा के डॉ. एस.पी. सिंह बघेल के सांसद चुन लिए जाने के कारण रिक्त इस सीट पर मतदान के दिन भाजपा व सपा के बीच मुकाबले को कई जगह बसपा ने त्रिकोणीय बना दिया। सपा से महराज सिंह धनगर और भाजपा से प्रेमपाल धनगर अर्थात दोनों दलों के उम्मीदवार धनगर होने के कारण इस जाति बंटवारा भी दिखा।
पर, मुस्लिमों का बड़ा हिस्सा सपा के साथ जाता दिखाई देना समाजवादी पार्टी खेमे के लिए उत्साहजनक रहा। हालांकि विकास कार्य न होने से नाराज लोगों का कुछ स्थानों पर मतदान बहिष्कार भाजपा के लिए समस्या बना लेकिन बसपा से संजीव चक की मौजदूगी अनुसूचित जाति के वोटों में अच्छी सेंधमारी सपा को बढ़त लेने से रोकते दिखी।
घाटमपुर: योगी सरकार में मंत्री कमलरानी वरुण के निधन से रिक्त सीट घाटमपुर में ज्यादातर मतदान केंद्रों पर त्रिकोणीय मुकाबला दिखाई दिया। बसपा कुछ स्थानों पर अपने परंपरागत वोटों के बीच पकड़ बनाए दिखी लेकिन अल्पसंख्यकों का बड़ा हिस्सा सपा के साथ दिखा। भाजपा व सपा के साथ टक्कर के बीच इस सीट पर कांग्रेस ने भी लोगों को बताने की कोशिश की कि उसे खत्म हुआ न माना जाए।
कांग्रेस के उभार ने इस सीट पर भाजपा के लिए सपा से मुकाबले की चुनौती को और कड़ा बना दिया। सुरक्षित सीट होने के कारण अनुसूचित जाति का वोट बसपा सहित चारों पार्टियों में बंटता दिखा। यहां भाजपा से उपेंद्र पासवान, सपा से पूर्व विधायक इंद्रजीत कोरी, बसपा से कुलदीप शंखवार और कांग्रेस से डॉ. कृपा शंकर उम्मीदवार हैं ।
बांगरमऊ: भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर के विधानसभा की सदस्यता के अयोग्य हो जाने के कारण इस सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा, सपा और कांग्रेस में मुकाबला होता दिखा। मुस्लिम मतदाता कांग्रेस व सपा के बीच जाते दिखे जबकि कांग्रेस की आरती वाजपेयी की उपस्थिति ब्राह्मण मतदाताओं के बीच भी ठीक से दिखाई दी।
पिछड़ी जातियों के वोटों में बंटवारा दिखा लेकिन कुछ स्थानों पर भाजपा व कांग्रेस के सीधे मुकाबले ने इस सीट के समीकरणों को रोचक बना दिया है। अनुसूचित जाति के बीच कुछ स्थानों पर बसपा भी मजबूत पकड़ बनाए दिखी लेकिन मुख्य मुकाबले की स्थिति भाजपा, कांग्रेस और सपा के बीच ही दिख रही है। भाजपा ने पूर्व जिलाध्यक्ष श्रीकांत कटियार, सपा ने सुरेश पाल, बसपा ने महेश पाल और कांग्रेस ने पूर्व मंत्री गोपीनाथ दीक्षित की बेटी आरती वाजपेयी को उम्मीदवार बनाया है।
मल्हनी: पूर्व मंत्री व सपा नेता पारसनाथ यादव के निधन से रिक्त जौनपुर की मल्हनी सीट पर मतदान का रुझान पुरानी राह पर ही दिखा। भाजपा व सपा के मुकाबले को निर्दलीय धनंजय सिंह ने त्रिकोणीय बना दिया। जिसे कहीं-कहीं बसपा ने चतुष्कोणीय करने की कोशिश की। सपा उम्मीदवार लकी यादव जो इस सीट से विधायक रहे पारसनाथ यादव के पुत्र हैं उनके पक्ष में मतदाताओं की सहानुभूति सपा के लिए लाभकारी दिखा।
यादव और मुस्लिम उसके साथ मजबूती से खड़ा दिखा। उधर, अति पिछड़ों के बीच धनंजय भाजपा को नुकसान पहुंचाते दिखे। ब्राह्मण मतदाताओं का बड़ा वर्ग भाजपा के मनोज सिंह के साथ जाने के संकेत दिखे लेकिन मतदान के दिन समीकरणों और मतदाताओं के रुख को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि नतीजे का ऊंट किस करवट बैठेगा। कांग्रेस ने यहां राकेश मिश्र और बसपा ने जयप्रकाश दुबे को प्रत्याशी बनाया है ।
देवरिया: भाजपा विधायक जन्मेजय सिंह के निधन के कारण इस सीट पर हो रहे उपचुनाव में मतदान के दिन मुख्य मुकाबला भाजपा व सपा के बीच सिमटता दिखा। जिसमें भाजपा के बागी पूर्व विधायक जन्मेजय सिंह के पुत्र अजय सिंह कमल के लिए कठिनाइयां बढ़ाते देखे गए । निर्दलीय लड़ रहे अजय भी अपने स्वाजातीय वोटों के बीच भाजपा को काफी नुकसान पहुंचाते दिखे।
ऊपर से मतदाताओं की सुस्ती और क्त्रस्य केंद्रों को खोलने को लेकर एक मंत्री के प्रति नाराजगी भी भाजपा के लिए समस्या बनी। भाजपा ने डॉ. सत्यप्रकाश मणि त्रिपाठी, सपा ने पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्माशंकर त्रिपाठी, कांग्रेस से मुकुंद भाष्कर मणि त्रिपाठी और बसपा से अभयनाथ त्रिपाठी को उम्मीदवार बनाया है।