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यूपीः सड़क हादसे के आंकड़ों में लगातार इजाफा, ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर कम किए जाएंगे हादसे

Wed, 04 Nov 2020 12:30 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश में हर साल 40 हजार से अधिक सड़क हादसे होते हैं। इसमें लगभग 20 से 22 हजार लोग जान गंवा देते हैं। हर साल इस आंकड़े में लगातार इजाफा हो रहा है। इसे कम करने के लिए यातायात निदेशालय एक बार फिर से ब्लैक स्पॉट चिह्नित करने की तैयारी कर रहा है। ब्लैक स्पॉट उस स्थान को कहते हैं, जहां सड़क हादसे अधिक होते हैं। 
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अपर पुलिस महानिदेशक यातायात अशोक कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2018 में प्रदेश में 1270 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। इनमें से सर्वाधिक 57 हरदोई में, 52 प्रयागराज में और 49 बांदा में चिह्नित किए गए थे। जबकि सबसे कम ब्लैक स्पॉट फतेहपुर और जालौन में एक-एक चिह्नित किए गए थे। राष्ट्रीय राजमार्गों पर 678, राज्य के राजमार्गों पर 334 और अन्य राजमार्गों पर 258 ब्लैक स्पॉट थे। अब जिलों से वर्ष 2017, 2018 व 2019 में हुए सड़क हादसों के मद्देनजर ब्लैक स्पॉट के बारे में जानकारी मांगी गई है। 
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ऐसे चिह्नित करते हैं ब्लैक स्पॉट 

यातायात निदेशालय हर साल ब्लैक स्पॉट को चिह्नित करता है। मानक के मुताबिक किसी 500 मीटर की सड़क पर पिछले तीन साल में पांच बार दुर्घटना हुई हो या 10 लोगों की जान गई या एक ही हादसे में 10 लोगों की जान गई तो उस स्थान को ब्लैक स्पॉट घोषित किया जाता है।

इसके बाद निदेशालय इसकी सूची परिवहन विभाग या राजमार्ग प्राधिकरण को भेजता है। फिर उस ब्लैक स्पॉट को खत्म करने के लिए कदम उठाए जाते हैं। जैसे- सावधानी के लिए साइन बोर्ड, ब्रेकर या लाइट की व्यवस्था की जाती है।
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