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यूपी उपचुनाव : नतीजों ने सुना दी 2022 में भाजपा विधायकों के चेहरे में बड़े बदलाव की आहट

Wed, 11 Nov 2020 02:04 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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योगी आदित्यनाथ से बात करते पीएम मोदी - फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा के सात सीटों के उपचुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति की दिशा व दशा ही नहीं तय कर दी है बल्कि सत्तारूढ़ दल भाजपा की भविष्य की राजनीति की पदचाप भी सुनानी शुरू कर दी है । सात सीटों में पांच पर पार्टी के जमेजमाए नेताओं या उनके परिवारों तथा इस सीट से पार्टी के विधायक रहे लोगों के परिवार के बजाय नए कार्यकर्ताओं को उतारने के प्रयोग की सफलता  ने 2022 में भाजपा विधायकों के चेहरे में बड़े बदलाव की आहट सुना दी है ।

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दरअसल, विधानसभा की  जिन सात सीटों  पर उपचुनाव हुआ उनमें छह भाजपा के कब्जे में और एक जौनपुर की मल्हनी सपा के पास थी । इन सात सीटों में पांच सीटों पर उपचुनाव वहां के विधायकों की मृत्यु के कारण हुए जबकि दो बांगरमऊ और टूंडला में अन्य कारणों से। उन्नाव के बांगरमऊ में वहां के भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उम्रकैद के कारण उनकी सदस्यता रद्द हो गई थी। टूंडला में भाजपा के डॉ. एस.पी.सिंह बघेल के सांसद निर्वाचित होने के कारण उनके त्यागपत्र देने के कारण उपचुनाव हुआ।

इसलिए बदलाव की आहट
शेष पांच में एक जौनपुर की मल्हनी सपा के विधायक पारसनाथ यादव जबकि बाकी चार  में कानपुर की घाटमपुर पर  भाजपा की विधायक और योगी सरकार में मंत्री कमलरानी वरुण, अमरोहा की नौगावां सादात पर प्रदेश सरकार में मंत्री चेतन चौहान, बुलंदशहर में भाजपा के मुख्य सचेतक वीरेन्द्र सिंह सिरोही और देवरिया में भाजपा विधायक जनमेजय सिंह के निधन के कारण उपचुनाव हुआ। 
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छह सिटिंग सीटों में सिर्फ दो नौगावां सादात और बुलंदशहर छोड़कर शेष  चार देवरिया, टूंडला, घाटमपुर और बांगरमऊ में  वहां से विधायक रहे नेताओं के परिवारों के बजाय भाजपा ने कार्यकर्ताओं पर भरोसा किया। कार्यकर्ता भी ऐसे जिनकी कोई बड़ी राजनीतिक पारिवारिक पृष्ठभूमि नहीं थी। सिवाय संगठन दायित्वों के निभाने के। बावजूद इसके भाजपा के सफल प्रदर्शन ने यह संदेश दे दिया कि जनता का रुझान भाजपा के पक्ष में है न कि किसी व्यक्ति विशेष के प्रभाव में।

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कारण ये भी

यहां यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि पार्टी के विधायक रहे लोगों के परिवार के सदस्य लगातार टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने के कारण इनकी नाराजगी भी थी। देवरिया में तो टिकट न मिलने से नाराज स्व. विधायक जन्मेजय सिंह के पुत्र अजय ने तो बगावत कर मैदान में ताल भी ठोंक दी थी। बावजूद इसके देवरिया सहित सभी सिटिंग सीटों पर भाजपा को मिली विजय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रणनीति व प्रयोग पर मुहर लगाती दिख रही है। ये भी बता रही है कि पिछले दिनों भाजपा के कुछ विधायकों के सरकार को लेकर सार्वजनिक हुए तीखे सुरों का जनता से कोई वास्ता नहीं है।

एक वजह ये भी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के काम हों अथवा भाजपा को लेकर जनता में बना भरोसा। पर, इतना साफ हो गया है कि जनता भाजपा के किसी स्थानीय सांसद या विधायक के बजाय पार्टी के साथ है। भाजपा जिसे मैदान में भेजेगी वे उसे समर्थन देंगे। ये संदेश भाजपा के रणनीतिकारों को 2022 में बड़े बदलाव का प्रयोग करने की ताकत देता दिख रहा है। 

साथ ही भाजपा विधायकों को ये हिदायत भी कि संगठन से अलग उनकी कोई शक्ति नहीं। उम्मीद करनी चाहिए उपचुनाव के नतीजों के बाद आए दिन ट्विटर व फेसबुक पर या चिट्ठी लिखकर सरकार पर सवाल उठा रहे विधायक भी अपने सुर बदलने को मजबूर होंगे।
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