यहां यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि पार्टी के विधायक रहे लोगों के परिवार के सदस्य लगातार टिकट मांग रहे थे। टिकट न मिलने के कारण इनकी नाराजगी भी थी। देवरिया में तो टिकट न मिलने से नाराज स्व. विधायक जन्मेजय सिंह के पुत्र अजय ने तो बगावत कर मैदान में ताल भी ठोंक दी थी। बावजूद इसके देवरिया सहित सभी सिटिंग सीटों पर भाजपा को मिली विजय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की रणनीति व प्रयोग पर मुहर लगाती दिख रही है। ये भी बता रही है कि पिछले दिनों भाजपा के कुछ विधायकों के सरकार को लेकर सार्वजनिक हुए तीखे सुरों का जनता से कोई वास्ता नहीं है।
एक वजह ये भी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के काम हों अथवा भाजपा को लेकर जनता में बना भरोसा। पर, इतना साफ हो गया है कि जनता भाजपा के किसी स्थानीय सांसद या विधायक के बजाय पार्टी के साथ है। भाजपा जिसे मैदान में भेजेगी वे उसे समर्थन देंगे। ये संदेश भाजपा के रणनीतिकारों को 2022 में बड़े बदलाव का प्रयोग करने की ताकत देता दिख रहा है।
साथ ही भाजपा विधायकों को ये हिदायत भी कि संगठन से अलग उनकी कोई शक्ति नहीं। उम्मीद करनी चाहिए उपचुनाव के नतीजों के बाद आए दिन ट्विटर व फेसबुक पर या चिट्ठी लिखकर सरकार पर सवाल उठा रहे विधायक भी अपने सुर बदलने को मजबूर होंगे।