उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की एक हजार सुहानी सेवा की बसों हवाई जहाज की तर्ज पर निगरानी होगी। बस के प्रस्थान से 30 मिनट पहले डिपो को सुहानी सेवा का बस नंबर, ड्राइवर-कंडक्टर कौन और वीटीएस नंबर का विवरण सेंट्रल कंट्रोल एवं कमांड सेंटर का उपलब्ध कराना पड़ेगा।
कमांड सेंटर इस विवरण से बस के प्रस्थान होने के बाद से गंतव्य तक पहुंचने तक निगरानी करेगा। ये बातें परिवहन निगम के चेयरमैन आनंद मिश्र ने कहीं।
चेयरमैन ने परिवहन निगम मुख्यालय में बुधवार को कमांड सेंटर का उद्घाटन करने के बाद पत्रकारों को बताया कि हवाई जहाज की तर्ज पर सुहानी सेवा की बसों की निगरानी करने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल साफ्टवेयर (एटीसी) सिस्टम पर आधारित कमांड सेंटर का विकसित किया है।
चेयरमैन ने कमांड सेंटर के लिए एमडी की सराहना करते हुए कहा कि एटीसी सिस्टम में डिपो के द्वारा सुहानी सेवा बस की एक भी सूचना सहीं न होने पर रेड सिग्नल हो जाएगा। यानी बस की वीटीएस खराब होने, ड्राइवर एवं कंडक्टर का नाम न उल्लेख न करने पर तत्काल क्षेत्र के रीजनल मैनेजर को शिकायत पहुंच जाएगी। वहीं सूचनाएं सही न होने पर सिग्नल ग्रीन होगा।
बस कहां-कहां रुकी,यह होगा पता
इसके बाद सुहानी सेवा की बस कितने बजे चली, कहां कब, कितनी देर रुकी और गंतव्य को कब पहुंची की खबर पल-पल मिलेगी। इस कमांड सेंटर से प्रदेश के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा सकेगी।
बस को 80 किमी से ऊपर दौड़ाने वाले ड्राइवरों की रोजाना की रिपोर्ट एमडी से लेकर रीजनल मैनेजर तक कार्रवाई करने के लिए जाएगी। समारोह में के.विजयेंद्र पांडियन, सुरेंद्र राम, एचएस गाबा, सत्यनरायन एवं जेपी सिंह अन्य अफसर एवं कर्मचारी शामिल हुए।
प्रबंध निदेशक मुकेश कुमार मेश्राम ने बताया कि कमांड सेंटर में हेल्पडेस्क की स्थापना की गई है। कमांड सेंटर के व्हास्टएप मोबाइल नंबर 9415049606 पर शिकायत की जा सकेगी।
इस शिकायत पर एक कोड निर्धारित होगा जिसकी सुनवाई हफ्ते में चार दिन एमडी, एएमडी, सीजीएम (ओ), सीजीएम (टी) के द्वारा की जाएगी। वहीं कमांड सेंटर के टोल फ्री नंबर 18001802877 पर टिकट आरक्षण, टिकट निरस्तीकरण, रिफंड की जानकारी हासिल कर समस्या का निराकरण करा सकेंगे।
परिवहन निगम के सीजीएम, जीएम, रीजनल मैनेजर, सर्विस मैनेजर, असिस्टेंट रीजनल मैनेजर एवं टीएस के मोबाइल नंबर कनेक्ट किए गए हैं। इससे बड़े अफसर अपने अधीनस्थ की लोकेशन को मोबाइल नंबर के नंबर के जरिए पता कर सकेंगे। अमूमन एआरएम घर में होते और लोकेशन डिपो की बताते हैं। वहीं बस दुर्घटना होने पर इस सिस्टम से कौन अफसर घटना स्थल के पास है को मौके पर भेजा जा सकेगा।