मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा का ग्राफ गिर रहा है और देश-प्रदेश गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ेपन, पलायन व भ्रष्टाचार से जूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा की सोच संकीर्ण, सामंती, जातिवादी होने के साथ जेन-जी, जेन अल्फा एवं आमजन विरोधी रवैये वाली है। उन्होंने जीएसटी की नई व्यवस्था और यूपीआई से जुड़ी नई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। आईआईटी मुंबई में दलित छात्र की आत्महत्या का जिक्र करते हुए उन्होंने जातिवाद पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जीडीपी वृद्धि का लाभ गरीबों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच रहा है।
ईशान आनंद ने मायावती के पैर छूकर लिया आशीर्वाद।
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राष्ट्रीय संयोजक बनने के बाद ईशान आनंद ने अपने दो मिनट के संबोधन में भरोसा दिलाया कि वह इस जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाएंगे और निराश नहीं करेंगे। बैठक में ईशान, उनके पिता एवं पार्टी उपाध्यक्ष आनंद कुमार समेत तमाम नेता पदाधिकारियों के साथ अगली पंक्ति में बैठाए गए थे। आमतौर पर बड़े पदाधिकारियों के लिए अलग से बैठने का इंतजाम रहता था।