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UP : अब उपचुनाव न लड़ने का फैसला बसपा को कर सकता है कमजोर, इन दलों को मिलेगा बढ़ने का मौका

Tue, 26 Nov 2024 12:13 AM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्र, अमर उजाला, लखनऊ

सार

BSP will stay away from by-elections: बसपा सुप्रीमों मायावती ने कहा है कि वह उपचुनावों से दूर रहेगी। राजनीतिक टीकाकारों का मानना है कि उसके इस फैसले से पार्टी को दूरगामी नुकसान भी हो सकता है। 
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यूपी उपचुनाव परिणाम। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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 उपचुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद बहुजन समाज पार्टी के नए फैसले ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। भविष्य में उपचुनाव नहीं लड़ने के बसपा सुप्रीमो मायावती के फैसले के सियासी निहितार्थ तलाशे जाने लगे हैं। जानकारों की मानें तो बसपा जल्द ही कुछ अहम फैसले ले सकती है, जिसमें किसी भी दल से चुनावी गठबंधन नहीं करने का पुराना फैसला पलटा जा सकता है।

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दरअसल, बसपा को बीते कई चुनावों में लगातार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी संगठन कमजोर पड़ चुका है, जिसकी वजह से उसके प्रत्याशी चुनाव में जीत नहीं पा रहे हैं। संगठन को मजबूत करने के लिए बसपा सुप्रीमो की तमाम कवायदें असर नहीं दिखा रही हैं। पार्टी के अधिकतर बड़े नेता सक्रिय नहीं हैं, अथवा उनकी भूमिका केवल प्रत्याशियों का चयन करने तक सीमित रह गई है। पार्टी द्वारा बीते दिनों सदस्यता शुल्क की राशि कम करने का भी कोई खास फायदा नहीं मिला है। जानकारों की मानें तो इसकी वजह से पार्टी को किसी दूसरे दल से गठबंधन नहीं करने का अपना फैसला बदलना पड़ सकता है। इससे भले ही उसे सत्ता हासिल न हो सके, पार्टी का अस्तित्व बचाने के लिए सांसद और विधायक मिल सकते हैं।
 

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कभी थे अपने, अब कर रहे कमजोर

मायावती के इस फैसले से हैरत में सियासी जानकार - फोटो : अमर उजाला
इसके विपरीत आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के संगठन का तेजी से विस्तार होता जा रहा है। बसपा का हालिया फैसला आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद को अपने पैर और ज्यादा मजबूती से जमाने का अवसर दे सकता है। कभी विधान परिषद में बसपा सदस्य एवं जोनल कोआर्डिनेटर रहे सुनील चित्तौड़ अब आजाद समाज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं। पश्चिमी उप्र में पार्टी के विस्तार के पीछे उनकी भूमिका अहम मानी जाती है। बता दें कि इससे पहले बसपा के तमाम बड़े नेता भाजपा, सपा और कांग्रेस के पाले में जा चुके हैं। चार बार की बसपा सरकार में अहम विभागों का जिम्मा संभालने वाला कोई भी नेता अब बसपा के साथ नहीं है।
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