राजधानी की सड़कों पर 'मुखबिर' के भरोसे पर ओवरलोड वाहन दौड़ रहे हैं। वाहन मालिकों की ओर से रखे गए ये लोग परिवहन अफसरों पर नजर रखकर उनकी गतिविधियों की जानकारी देते हैं। इसके बदले इन्हें 10-15 हजार रुपये महीना तनख्वाह मिलती है। खास बात यह है कि मुखबिर अफसरों के लिए भी काम करते हैं। ये मुखबिर पूरे प्रदेश में ओवरलोड वाहनों के दौड़ने में अहम भूमिका अदा करते हैं। इन्हें उन अफसरों के आसपास रखा जाता है, जो प्रवर्तन से जुड़े हों और जिनके पास वाहनों की जांच का जिम्मा रहता है।
सूत्र बताते हैं कि ऐसे मुखबिरों का तंत्र अफसरों के पास भी रहता है, जो ओवरलोडिंग कर गुजरने वाले वाहनों की सूचना देते हैं। ये अफसरों की लाइव लोकेशन व्हॉट्सएप ग्रुप पर अपने मालिकों को देते हैं।
डीटीसी ने दिए जांच के आदेश एसटीएफ की कार्रवाई के बाद डिप्टी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर की ओर से आरटीओ, प्रवर्तन प्रभात कुमार पांडेय को मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। लखनऊ ही नहीं, फतेहपुर, उन्नाव व अन्य जगहों पर जांच कराकर रिपोर्ट जमा करनी होगी।