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यूपी: बसपा राज में खूब फूले-फले ब्राह्मण नेता, सत्ता जाने के बाद से बढ़ी दूरियां; अब खतरे में सोशल इंजीनियरिंग

Sun, 16 Aug 2026 09:33 AM IST
रोहित मिश्र अशोक मिश्रा, अमर उजाला ब्यूरो लखनऊ

सार

 Brahmin leaders in BSP: बसपा के अपने बूते सत्ता में आने में ब्राह्मण वोटरों की बड़ी भूमिका रही। उस दौरान कई ब्राह्मण नेताओं का रसूख पार्टी में बढ़ गया था। 
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यूपी में बदल रही है बसपा। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बहुजन समाज पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग में ब्राह्मणों की भूमिका किसी से छिपी नहीं है। बीते दो दशकों में कई ब्राह्मण नेता बसपा की ताकत बने तो उनके कुनबे के सदस्य भी पीछे नहीं रहे। ब्रजेश पाठक, सतीश चंद्र मिश्रा, विनय शंकर तिवारी, रामवीर उपाध्याय, राकेश तिवारी के साथ उनके कुनबे के सदस्यों को भी बसपा ने राजनीति में स्थापित किया, लेकिन सतीश मिश्रा के अलावा बाकियों ने धीरे-धीरे साथ छोड़ दिया। वर्तमान में बसपा में ब्राह्मण नेताओं की कमी होने से उसका सोशल इंजीनियरिंग का फॉर्मूला खतरे में है।

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इसके अलावा दद्दन मिश्रा, राजेश त्रिपाठी, शिव प्रताप मिश्रा, रामू द्विवेदी जैसे तमाम ब्राह्मण नेता भी बसपा से दूर होते गए। ब्रजेश पाठक के करीबी परिजन अरविंद त्रिपाठी उर्फ गुड्डू त्रिपाठी बसपा के एमएलसी बने थे। विनय शंकर तिवारी के कई परिजन भी बसपा सरकार में अहम पदों पर रहने के साथ विधायक बने। रामवीर उपाध्याय की पत्नी और भाई भी बसपा में शामिल होकर राजनीति में पर्दापण किया था। राकेश तिवारी के बेटे और भाई भी बसपा में रह चुके हैं। इसके अलावा तमाम ब्राह्मण नेता बसपा के टिकट पर सांसद और विधायक बने लेकिन बाद में दूसरे दलों में चले गए।

बसपा से जुड़ें ब्राह्मण, मिलेगा पूरा सम्मान : मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती। - फोटो : amar ujala
बसपा अध्यक्ष मायावती ने ब्राह्मणों से पार्टी के साथ मजबूती से जुड़ने की अपील की है और उन्हें चुनाव और सरकार बनने पर पूरा सम्मान देने का आश्वासन दिया है। शुक्रवार को जारी अपने बयान में उन्होंने कहा ब्राह्मण समाज व अन्य सभी समाज के जो लोग पार्टी से निकाले गए हैं, वे अपने निजी स्वार्थ में दूसरी पार्टियों में चले गए अथवा अपने गलत कारनामों के बाद बचने के लिए सत्ताधारी दल में शामिल हो गए। उनका पार्टी के प्रति समर्पण भाव लोगों की निगाह में भी सशंकित व निराशाजनक रहा है। बसपा सरकार में भी ऐसे लोगों ने अपने निजी व पारिवारिक स्वार्थ के लिए पार्टी का फायदा उठाया और अपने समाज व पार्टी के हित में निष्क्रिय व उदासीन रहे।

अपनेे समाज को भी बसपा से नहीं जोड़ा। इससे पिछले कई लोकसभा व विधानसभा चुनाव में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा। ईमानदार व निष्ठावान लोगों द्वारा नए लोगों खासकर युवाओं को पार्टी की नर्सरी में तैयार किया जाता रहा है। ये सभी संघर्ष के दौर में काम आएंगे। ब्राह्मण समाज पार्टी से जुड़ा रहे। उन्हें हर चुनाव में उम्मीदवार बनाने तथा सरकार बनने पर वर्ष 2007 की तरह ही इनको व अन्य सभी समाज को भी पूरा मान-सम्मान दिया जाता रहेगा। बसपा को जमीनी स्तर पर तैयार करने में अब दलित समाज को ही अहम भूमिका निभानी है। बसपा की नर्सरी सर्वसमाज के हसीन गुलदस्ते से ही हरी-भरी व सजी रहती है।
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मायावती मेरी बड़ी बहन, उनका फैसला स्वीकार है : अंटू

मायावती और अंटू मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
 बसपा से निष्कासित पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्रा उर्फ अंटू ने कहा कि मायावती उनकी बड़ी बहन हैं और यह रिश्ता हमेशा रहेगा। उनका फैसला स्वीकार है हालांकि मैंने ऐसा कोई कार्य नहीं किया जो अनुशासनहीनता के दायरे में आता हो। मुझे पार्टी के कार्यक्रमों में कोऑर्डिनेटर्स बुलाते नहीं थे। मुझे तो बाद में जानकारी मिलती थी। मेरा भी सम्मान है। बिना बुलाए कैसे चला जाता। फिर भी मैं बसपा कार्यकर्ताओं की मदद कर रहा था। ब्राह्मण समाज को भी जोड़ रहा था। बसपा ने मुझे बहुत कुछ दिया है। उसके कार्यकर्ता मेरे लिए देवतुल्य हैं।

निष्कासन के बाद पहली बार मीडिया से शनिवार को अंटू मिश्रा मुखातिब हुए। उन्होंने कहा कि छात्र जीवन से लेकर अब तक मेरा 40 वर्ष का राजनीतिक सफर रहा है। बसपा के साथ बीते 23 साल से जुड़ा रहा हूं। मैंने अपनी क्षमता से अधिक पार्टी के लिए कार्य किया। मुझ पर लगे आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता हूं। अब मैं अपने समाज, बसपा के लोगों के पास जाकर उनकी रायशुमारी लूंगा उसके बाद आगे की रणनीति बनाऊंगा। वर्तमान में राजनीति तेजी से बदल रही है, लिहाजा परिस्थितियों के मुताबिक फैसला लेंगे। अब पार्टी में वापसी का प्रयास भी नहीं करेंगे।
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