यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 25 दिसंबर से 25 जनवरी के बीच पूरी कराई जाएंगी। बोर्ड सचिव प्रभा त्रिपाठी ने बताया कि 10 दिसंबर तक सभी क्षेत्रीय केन्द्रों को प्रयोगात्मक परीक्षा के बारे में जानकारी भेज दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि शासन की ओर से बोर्ड परीक्षा 19 फरवरी से कराने का फैसला किया गया है। सचिव ने बताया कि उम्मीद है कि एक दिसंबर तक परीक्षा कार्यक्रम जारी कर दिया जाएगा।
राजकीय और अनुदानित माध्यमिक, डिग्री, तकनीकी संस्थानों से सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षक भी यूपी बोर्ड में इस साल प्रयोगात्मक परीक्षा में परीक्षक बन सकेंगे।
इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से निर्धारित फॉर्म पर अपना ब्यौरा देना होगा। इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक पीसी यादव ने आदेश जारी कर दिया है।
यूपी बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए परीक्षक की नियुक्ति माध्यमिक शिक्षा परिषद कार्यालय से की जाती है। शिक्षकों की कमी देखते हुए माध्यमिक और डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को भी परीक्षक बनाया जा रहा है।
परीक्षक बनने के लिए केवल राजकीय और सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक ही पात्र हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक पीसी यादव के आदेश के अनुसार राजधानी के ऐसे शिक्षक, जो सरकारी या अनुदानित कॉलेज से रिटायर हो चुके हैं, परीक्षक बनने के लिए ब्यौरा दे सकते हैं।
इनके नाम बोर्ड को भेज दिए जाएंगे, जहां से इनकी तैनाती परीक्षक के रूप में की जाएगी।
न परीक्षा केन्द्र, ना ही केन्द्र निरीक्षक हुए घोषित
नए शैक्षिक सत्र की घोषणाओं को छोड़कर यूपी बोर्ड में कुछ भी तय समय से नहीं चल रहा है। राजधानी में अभी तक न ही परीक्षा केंद्रों की घोषणा हुई है और ना ही कक्ष निरीक्षकों का ब्यौरा जुट पाया है। यूपी बोर्ड का शैक्षिक सत्र इस साल तीन महीने पहले शुरू किया जा रहा है।
यूपी बोर्ड का नया शैक्षिक अप्रैल में शुरू करने के लिए बोर्ड परीक्षाएं इस साल 19 फरवरी से प्रस्तावित हैं। परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की घोषणा अक्तूबर में हो जानी थी। अब परीक्षा केंद्रों की घोषणा अंतिम तिथि 30 नवंबर घोषित की गई है।
इसके बावजूद अभी तक परीक्षा केंद्रों की सूची जारी नहीं हो पाई है। बोर्ड परीक्षा के दौरान विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को ड्यूटी पर लगा देने की शिकायतों के कारण इस साल बोर्ड ने कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र केंद्रीय स्तर पर जारी करने का फैसला किया है।
इस काम के लिए बोर्ड ने सभी शिक्षकों का ब्यौरा जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से एक दिसंबर तक मांगा है।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने शिक्षकों का ब्यौरा देने के लिए अंतिम तिथि 24 नवंबर तय की थी। अंतिम तिथि बीतने के बाद अब तक केवल 40 कॉलेजों की ओर से ही कक्ष निरीक्षक ड्यूटी के लिए ब्यौरा उपलब्ध कराया गया है।
अभी तक सभी परीक्षा केंद्रों की जांच की रिपोर्ट नहीं आ पाई है। केवल कुछ कॉलेजों की रिपोर्ट अभी नहीं मिली है। इसलिए जिला परीक्षा समिति की बैठक आयोजित नहीं हो पाई है।
सीसीटीवी पर 2.50 अरब के बजट से बैकफुट पर शासन
यूपी बोर्ड परीक्षा में प्रदेश सरकार की ओर से सीसीटीवी कैमरा लगाने पर बैकफुट पर आने का निर्णय इसे लगाने वाले खर्च को लेकर किया जा रहा है। यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा के दौरान लगभग 11 हजार केन्द्र बनाए जाने की उम्मीद है।
इन परीक्षा केन्द्रों पर कम से कम 20 कमरों में परीक्षा होगी। एक परीक्षा केन्द्र सीसीटीवी लगाने का खर्च दो से 2.5 लाख के बीच आएगा। ऐसे में प्रदेश भर में सीसीटीवी कैमरा लगाने का पूरा खर्च लगभग 2.50 अरब आएगा।
पता चला है कि शासन ने यूपी बोर्ड से परीक्षा केन्द्र बनाए जाने वाले राजकीय, वित्तपोषित एवं वित्तविहीन विद्यालयों के बारे में जानकारी मांगी है। इन विद्यालयों में कहां सीसीटीवी की व्यवस्था लागू है। बोर्ड ने इसी बात को ध्यान में रखकर अब नई मान्यता देने के लिए सीसीटीवी लगाने को अनिवार्य कर दिया है।