भाजपा ने दिल्ली के बाद उत्तर प्रदेश में भी बुजुर्ग नेताओं को विश्राम देने और युवाओं को काम में लगाने का फैसला लिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य की टीम का गठन इसी फार्मूले पर किया जाएगा। जहां तक बुजुर्ग नेताओं का सवाल है, तो उनका उपयोग चुनाव प्रबंधन और संगठनों के बीच समन्वय के लिए किया जाएगा।
रणनीतिकारों ने तय किया है कि केशव की टीम का गठन न सिर्फ विधानसभा चुनाव, बल्कि 2019 के लोकसभा चुनाव को भी ध्यान में रख कर किया जाए।
इनका मानना है कि विधानसभा से लेकर अगले लोकसभा चुनाव तक में चूंकि युवा मतदाता ही निर्णायक भूमिका में रहने वाला है। इस लिहाज से टीम में युवाओं को रखना ही ठीक रहेगा।
इससे एक ओर जहां युवाओं को पार्टी के साथ जोड़ने का काम प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा, वहीं चुनावी दौड़भाग में भी आसानी रहेगी।