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सपा के खिलाफ आर-पार की लड़ाई में उतरी भाजपा, दी चुनौती

Sun, 05 Jul 2015 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रदेश सरकार के खिलाफ भाजपा के सांसद शनिवार को विधान भवन के सामने धरने पर बैठे। तमाम सांसद और पार्टी के नेता रात में भी धरना पर डटे रहे।
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प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने ऐलान किया कि धरना अब दो दिन चलेगा। रविवार सुबह 10 बजे तक सांसदों का ज्ञापन लेने के लिए मुख्यमंत्री की तरफ से मुख्य सचिव को भेजकर ज्ञापन मंगवाने का इंतजार होगा।

मुख्य सचिव नहीं आए या मुख्यमंत्री के यहां से कोई नहीं आया तो पार्टी के नेता और सांसद मुख्यमंत्री को ज्ञापन देने के लिए उनके आवास को कूच करेंगे। धरना पर केंद्र सरकार में मंत्री सांसदों में कोई नहीं था।
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सांसदों में कई ने प्रदेश सरकार के खिलाफ तमाम आरोप लगाए। कहा कि सरकार के इशारे पर प्रदेश की सरकारी मशीनरी सांसदों के विकास संबंधी प्रस्तावों पर कार्रवाई ही नहीं करती। भेदभाव सिर्फ सांसदों के साथ ही नहीं बल्कि लोगों के साथ भी किया जा रहा है।

दशा नहीं किसानों का चेहरा देखकर दी गई राहत

भाजपा ने आरोप लगाए पिछले दिनों अतिवृष्टि और ओलावृष्टि के चलते किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए राहत देने में भी काफी भेदभाव किया गया। राहत किसानों की दशा देखकर नहीं बल्कि चेहरों को देखकर दी गई।

सांसदों ने बढ़ती महंगाई व कालाबाजारी को बढ़ावा, कानून-व्यवस्था संभालने में सरकार की असफलता, भ्रष्टाचार को बढ़ावा सहित अति पिछड़ी और दलित जातियों के बढ़ते उत्पीड़न और विभिन्न चयन आयोगों में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के आरोप सरकार पर लगाए।

डॉ. वाजपेयी के अलावा धरना को पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विनय कटियार, विधानमंडल दल नेता सुरेश खन्ना, विधान परिषद में नेता हृदयनारायण दीक्षित, पार्टी उपाध्यक्ष हरद्वार दुबे, महामंत्री स्वतंत्र देव सिंह सहित बारीबारी से लगभग 46 सांसदों ने संबोधित किया।

धरना में भाजपा के 74 में 46 सांसद शामिल

भाजपा के प्रदेश से कुल 74 सांसद हैं। इनमें 71 लोकसभा के सदस्य हैं और तीन विनय कटियार, मनोहर परिकर व मुख्तार अब्बास नकवी राज्यसभा के सदस्य हैं। लल्लू सिंह, महेन्द्र नाथ पाण्डेय, ब्रजभूषण शरण सिंह, जगदंबिका पाल, हरीश द्विवेदी, वीरेन्द्र सिंह मस्त, विनोद सोनकर, राघव लखन पाल, भारतेन्दु सिंह, डॉ. यसवंत सिंह, राजेन्द्र अग्रवाल, डॉ. सतपाल सिंह, डॉ. भोला सिंह, सतीश गौतम, राजेश दिवाकर, चौधरी बाबूलाल, राजवीर सिंह, धर्मेन्द्र कुमार कश्यप, कृष्णा राज, अजय मिश्र टेनी, रेखा वर्मा,  राजेश वर्मा, अंशुल वर्मा, अंजू बाला, कौशल किशोर, मुकेश राजपूत, देवेन्द्र सिंह भोले, भानु प्रताप वर्मा, पुष्पेन्द्र सिंह चन्देल, भैरो प्रसाद मिश्रा,  केशव प्रसाद मौर्य, श्यामा चरण गुप्त, प्रियंका रावत, सावित्री बाई फुले, दद्न मिश्र, कीर्तिवर्धन सिंह, शरद त्रिपाठी, पंकज चौधरी, कमलेश पासवान, नीलम सोनकर, हरिनारायण राजभर, रविन्द्र कुशवाहा, भरत सिंह, के.पी. सिंह व छोटे लाल खरवार।
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ये सांसद नहीं आए

डॉ. मुरली मनोहर जोशी, हेमामालिनी, महंत आदित्यनाथ, कंवर सिंह तंवर, राजेश पांडेय व राम चरित निषाद। भाजपा की तरफ से बताया गया कि ये सांसद अस्वस्थता के कारण धरना में नहीं आ सके। इसके अलावा हुकुम सिंह, सर्वेश सिंह, डॉ. नैपाल सिंह, सत्यपाल सैनी, सच्चिदानंद हरि साक्षी, वरुण गांधी, अशोक दोहरे, हरिओम पांडेय भी धरना में नहीं रहे। पार्टी के अनुसार, इन सबने अलग-अलग वजहों से न आने पाने के बारे में प्रदेश को जानकारी दी है।

गोया धरना नहीं सभा हो..
धरना पर आने वाले सांसदों का संचालक की तरफ से अभिनंदन भी किया जा रहा था। साथ ही उसका स्वागत भी हो रहा था। ऐसा लग रहा था  कि जैसे धरना नहीं कोई सभा हो।

वही, भाजपा के गठबंधन में जीते अपना दल को दो सांसद अनुप्रिया पटेल और कुंवर हरिबख्श सिंह में से कोई भी धरना में नहीं दिखा। हालांकि यह चर्चा रही कि दोनों सांसद शाम तक आ सकते हैं। पर, शाम तक भी नहीं आए।
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