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यूपी भाजपा के नए अध्यक्ष ने बताई अपनी प्राथमिकता, ये हैं उनकी बड़ी चुनौतियां

Fri, 01 Sep 2017 10:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय
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भाजपा के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय ने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद प्रधानमंत्री से उन्हें केन्द्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री के पद से मुक्त करने का आग्रह किया है।
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पांडेय ने बयान जारी कर कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने जो दायित्व दिया है उसे ईमानदारी व निष्ठा से पूरा करूंगा। प्रदेश में कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के सहयोग से संगठन को मजबूत किया जाएगा।

कई चुनौतियों से रूबरू होना होगा महेंद्र पांडेय को
डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय पिछले 14 वर्षों में प्रदेश अध्यक्ष बने नेताओं में इस मामले में सबसे खुशनसीब हैं कि इस समय केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की ही सरकार है। इसलिए उन्हें बहुत ज्यादा जमीनी संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। इसके बावजूद उनकी राह पूरी तरह निरापद नहीं रहने वाली है। सत्तारूढ़ दल का अध्यक्ष होने के नाते उनके सामने कई चुनौतियां रहेंगी। कई परीक्षाएं भी इंतजार कर रही हैं, जिनसे उन्हें पार पाना पड़ेगा। साथ ही उन्हें कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करके निकाय चुनाव और 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी की जीत में पूरी ताकत लगा देने के लिए जुटने को तैयार करना पड़ेगा।
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प्रदेश में तीन चौथाई बहुमत से बनी सरकार के सामने लगभग 14 वर्षों से पद-प्रतिष्ठा की प्रतीक्षा कर रहे नेताओं व कार्यकर्ताओं में उमड़ रही आकांक्षाओं तथा अपेक्षाओं को संतुष्ट करने की चुनौती खड़ी है। प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद डॉ. पांडेय को भी इस चुनौती का सामना करना पड़ेगा। हजारों कार्यकर्ताओं की अपेक्षाएं ज्यादा हैं जबकि समायोजन किए जाने वाले पदों की संख्या सीमित है। जाहिर है, पांडेय को यह सब काम इस तरह करना होगा कि कार्यकर्ताओं में नाराजगी न फैले और समायोजन भी हो जाए।
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ये हैं उनकी चुनौतियां

- फोटो : अमर उजाला
-पिछले दिनों लखनऊ के तीन दिन के दौरे पर आए राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के सामने सरकार के मंत्रियों के रवैये को लेकर कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई थी। अध्यक्ष के नाते डॉ. पांडेय को इस बारे में ठोस उपाय करने होंगे।

-कार्यकर्ताओं की तरफ से सुनवाई न होने की शिकायतें भी शाह के सामने उठ चुकी हैं। यह भी बात कही गई कि सरकारी मशीनरी उनके साथ पहले की ही तरह उपेक्षापूर्ण व्यवहार करती है। इस बारे में भी पांडेय को सरकार से समन्वय बनाकर कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करना होगा।

- निकाय चुनाव में इस बार टिकटों और उम्मीदवारी जबर्दस्त मारामारी रहेगी। लोकसभा चुनाव की तैयारियां भी उन्हें देखनी होंगी। टिकट वितरण के साथ सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष के नाते जन अपेक्षाओं को पूरा करते हुए उनसे अगले चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।

-सहकारिता चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन ठीक रखना भी बड़ी चुनौती है। यह ऐसा चुनाव है जिसमें भाजपा का अभी तक बहुत ज्यादा आधार नहीं रहा है। पर, सत्ता में होने के नाते भाजपा को इस चुनाव में भी बेहतर प्रदर्शन करके दिखाना होगा।
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