भले ही केंद्रीय मंत्रिपरिषद के विस्तार की अभी औपचारिक रूप से घोषणा न हुई हो लेकिन प्रदेश भाजपा नेताओं के बीच इसको लेकर सक्रियता शुरू हो गई है।
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एक ओर दावेदार अपने-अपने तर्कों के साथ सक्रिय हैं तो दूसरी तरफ पार्टी के नेता भी मोदी के मंत्रिपरिषद और केंद्रीय टीम के जरिये उत्तर प्रदेश के समीकरणों को दुरुस्त करने के विचार-विमर्श में जुटे हैं।
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल होने के लिए वैसे तो कई दावेदार मैदान में हैं। पर, मौजूदा स्थिति के मद्देनजर बहुत ज्यादा लोगों के मंत्री बनने की गुंजाइश नहीं है।
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दो से तीन लोगों की खुल सकती है किस्मत
जानकारी के मुताबिक, दो से तीन लोगों को ही यूपी से जगह मिल पाएगी। पार्टी हाईकमान सूबे के समीकरणों के मद्देनजर उत्तर प्रदेश से पिछड़े, भगवा और दलित चेहरों को महत्व देना चाह रहा है।
इस सिलसिले में जिन नामों पर विचार चल रहा है, उनमें फतेहपुर से सांसद साध्वी निरंजन ज्योति और गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ प्रमुख हैं।
हालांकि रामपुर से सांसद डॉ. नैपाल सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पुत्र राजवीर सिंह के नाम भी चर्चा में है।
कल्याण का राज्यपाल बनने से इनकार
पार्टी नेताओं का एक खेमा राजवीर सिंह और नैपाल सिंह को मंत्री बनाने के बजाय दूसरी भूमिकाएं देकर समीकरणों को दुरुस्त करने का तर्क दे रहा है। उनका कहना है कि राजवीर प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष हैं।
उनके पिता कल्याण सिंह के कहने पर लोकसभा की सात सीटें छोड़ी गई थी। इन सभी सीटों पर कल्याण सिंह की पसंद के लोग सांसद हैं। कल्याण सिंह ने राज्यपाल बनने से इन्कार कर दिया है। वह राज्यसभा जाना चाहते हैं।
ऐसे में राजवीर को मंत्री बनाने के बजाय संगठन के फोरम पर यूपी में ही सक्रिय करना ठीक रहेगा। नैपाल सिंह की उम्र का तर्क देकर उन्हें भी मंत्री के बजाय कुछ और भूमिका देने की बात कही जा रही है।
हिंदुत्व पर आक्रामक नहीं
रणनीतिकार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सरकार से लेकर संगठन तक भगवा चेहरों को भी उभारना चाह रहे हैं। जिससे मूल वोटर के बीच यह संदेश रहे कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंदुत्व पर बहुत आक्रामक भाषा नहीं बोल रहे हैं।
बावजूद इसके संगठन अपने मूल एजेंडे से इधर-उधर हटने वाला नहीं है। इस सिलसिले में वरुण गांधी को भी आगे करने पर विचार-विमर्श हुआ है। मोदी के फार्मूले के तहत वरुण मंत्रिपरिषद में फिट नहीं हो रहे हैं।
उनकी मां मेनका गांधी पहले से ही मंत्री हैं। वह खुद पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री हैं। इसलिए रणनीतिकार अब योगी आदित्यनाथ को आगे करना चाह रहे हैं। इनका मानना है कि योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल में जिस तरह हिंदुत्ववादी चेहरा बनकर उभरे हैं।
उन्होंने पूर्वांचल के पिछड़ों व अति पिछड़ों से लेकर दलितों के बीच पैठ बनाई है। उसके चलते योगी को मंत्री बनाने से लाभ होगा।
एक तीर से कई निशाने
अति पिछड़ों के समीकरण के साथ भगवा चेहरा ही साध्वी निरंजन ज्योति को राजवीर और डॉ. नैपाल सिंह की तुलना में बढ़त दे रहा है।
रणनीतिकार निरंजन ज्योति को मंत्रिपरिषद में शामिल करके एक तीर से कई निशाने साधना चाहते हैं। निरंजन ज्योति अति पिछड़े वर्ग निषाद जाति की है।
पार्टी नेताओं का मानना है कि इससे सूबे की अति पिछड़ी जातियों के बीच पार्टी की नीति व नीयत को लेकर ज्यादा आसानी से भरोसा पैदा किया जा सकेगा। साथ ही उनके भगवा चोला का इस्तेमाल करके हिंदुत्व के नाम पर संपूर्ण पिछडे़ समाज को जोड़ा जा सकेगा।
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की सोच है कि मेनका गांधी, उमा भारती, स्मृति ईरानी और निरंजन ज्योति के रूप में यूपी से चार महिलाओं की भागीदारी का संदेश देकर महिलाओं के बीच भी पैठ बढ़ाने में भी सुविधा रहेगी।
दलित चेहरों को महत्व जहां तक दलित चेहरे का सवाल है तो अभी इस सिलसिले में पार्टी किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। पर, आगरा से सांसद रामशंकर कठेरिया, जालौन से सांसद भानुप्रताप वर्मा और नगीना से डॉ. यशवंत के नाम चर्चा में हैं।
इन्हें मंत्रिपरिषद में जगह न मिली तो अन्य किसी रूप में महत्वपूर्ण भूमिका देकर आगे लाया जाएगा।